PoK और गिलगित-बाल्टिस्तान की संवैधानिक स्थिति बदलने की तैयारी कर रहा पाकिस्तान- रिपोर्ट
क्या है खबर?
हाल के दिनों में भारत और चीन के संबंध में सुधार की संभावना दिखने से पाकिस्तान को चिंता होने लगी है। यही वजह है कि पाकिस्तान सरकार पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) और गिलगित-बाल्टिस्तान के संवैधानिक ढांचे में बड़े बदलाव करने की योजना बना रही है। पाकिस्तान के सरकारी सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि पाकिस्तान इन दोनों क्षेत्रों को अंतरिम प्रांत जैसा दर्जा देने पर विचार कर रहा है। इसके लिए संवैधानिक कदम उठाया जा सकता है।
रिपोर्ट
क्या बदलाव कर सकता है पाकिस्तान?
न्यूज18 ने अपनी रिपोर्ट में सरकारी सूत्रों के हवाले से कहा कि पाकिस्तान PoK और गिलगित-बाल्टिस्तान के लिए एक नए संवैधानिक ढांचे पर विचार कर रहा है, जो इन दोनों क्षेत्रों को अंतरिम प्रांत जैसा दर्जा प्रदान कर सकता है।
यह बदलाव 28वें संविधान संशोधन के जरिए हो सकता है या इसके लिए अलग कानून भी लाया जा सकता है।
ये विचार कुछ वैसा ही है, जैसा भारत ने 2019 में अनुच्छेद 370 को लेकर किया था।
बदलाव
संविधान में क्या बदल सकता है?
रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तानी संविधान का अनुच्छेद 1(2) उन क्षेत्रों को परिभाषित करता है, जिन्हें देश का हिस्सा माना जाता है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस प्रावधान में बदलाव की संभावना पर भी विचार किया जा रहा है।
हालांकि, अभी इसकी अंतिम रूपरेखा सामने नहीं आई है। यह भी तय नहीं है कि अनुच्छेद 1(2) में संशोधन किया जाएगा या 28वें संविधान संशोधन को ही इसके लिए इस्तेमाल किया जाएगा।
वजह
भारत-चीन में वार्ता से घबराया पाकिस्तान
रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान भारत-चीन सीमा वार्ता पर बारीकी से नजर रख रहा है, जिसका जम्मू-कश्मीर पर पाकिस्तान की स्थिति और उसके नियंत्रण वाले क्षेत्रों की संवैधानिक स्थिति पर असर पड़ सकता है।
रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि पाकिस्तान इस बात की संभावना तलाश रहा है कि क्या कश्मीर विवाद पर उसके घोषित रुख को बरकरार रखते हुए दोनों क्षेत्रों को समान अंतरिम संवैधानिक दर्जा दिया जा सकता है।
वार्ता
NSA डोभाल और चीनी विदेश मंत्री के बीच हुई थी मुलाकात
पिछले हफ्ते भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजित डोभाल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी के बीच बैठक हुई थी। इसमें दोनों देशों ने तय किया कि वो सीमा विवाद को कूटनीतिक और बातचीत के जरिए सुलझाएंगे।
अगर भारत और चीन के बीच कोई समझौता होता है, तो इससे पाकिस्तान को अपनी कश्मीर नीति के पहलुओं का पुनर्मूल्यांकन करने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है, क्योंकि भारत-चीन सीमा विवाद जम्मू-कश्मीर के क्षेत्रीय विवाद से जुड़ा हुआ है।