पाकिस्तान ने सर क्रीक के पास नए सैन्य संसाधन तैनात किए, चीन-तुर्की की ली मदद- रिपोर्ट
क्या है खबर?
पाकिस्तान सर क्रीक के पास अपने नौसैनिक और सैन्य ढांचे का विस्तार कर रहा है। ये गुजरात के कच्छ और पाकिस्तान के सिंध प्रांत के बीच 96 किलोमीटर लंबी संवेदनशील खाड़ी है, जो अरब सागर में मिलती है। CCN-न्यूज18 की रिपोर्ट के मुताबिक, यह विस्तार 'अबाबील- द डिवाइन स्ट्राइक' नामक एक नई परियोजना का हिस्सा है। इसके तहत पाकिस्तानी नौसेना ने सर क्रीक में अपने नौसेना विशेष सेवा समूह (SSG-N) कमांडो तैनात किए हैं।
रिपोर्ट
होवरक्राफ्ट से लेकर ड्रोन तक किए तैनात
रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान तुर्की के ड्रोन, चीन के आधुनिक होवरक्राफ्ट और तेज गति से चलने वाली नौसैनिक नौकाओं के साथ-साथ नवीनतम रॉकेट और वायु रक्षा प्रणालियों को इस इलाके में तैनात कर रहा है।
रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया कि तुर्की के ड्रोन विस्फोटक सामग्री ले जाने में सक्षम हैं और इनका उपयोग निगरानी के लिए भी किया जा सकता है। इस प्रणाली का उद्देश्य बाहरी खतरों को नियंत्रित करना है।
चीन
चीन और तुर्की कर रहे तकनीकी और सैन्य मदद
रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान ने सर क्रीक और अरब सागर में भारत की नौसैनिक उपस्थिति को चुनौती देने के उद्देश्य से अपने समुद्री अभियानों में मानवरहित हवाई और समुद्री ड्रोन को शामिल किया है।
एक आंतरिक सूत्र ने बताया कि चीन और तुर्की दोनों ही उन्नत सैन्य उपकरण और तकनीक मुहैया कराकर पाकिस्तान के सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
अबाबील परियोजना में एक उन्नत वायु रक्षा प्रणाली शामिल है।
पनडुब्बी
असिम मुनीर पर सेना के आधुनिकीकरण का जिम्मा
रिपोर्ट के मुताबिक, चीन ने पाकिस्तान को पहली हैंगोर श्रेणी की पनडुब्बी सौंप दी है। इससे अरब सागर में पाकिस्तान की क्षमता में वृद्धि होगी।
साथ ही पाकिस्तान ने अपने नौसैनिक बेड़े के आधुनिकीकरण कार्यक्रम के तहत उन्नत चीनी तुगरिल श्रेणी के फ्रिगेट भी शामिल किए हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि फील्ड मार्शल असिम मुनीर एकीकृत कमान के तहत पाकिस्तान की सेना, नौसेना और वायु सेना के व्यापक आधुनिकीकरण की देखरेख कर रहे हैं।
प्लस
न्यूजबाइट्स प्लस
सर क्रीक गुजरात के कच्छ और पाकिस्तान के सिंध प्रांत के बीच 96 किलोमीटर लंबी खाड़ी है। आजादी से पहले यह बॉम्बे प्रेसीडेंसी का हिस्सा था।
सर क्रीक रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र है। यह इलाका अरब सागर के नजदीक है और यहां से पाकिस्तान के कराची बंदरगाह तक पहुंचा जा सकता है।
पाकिस्तान का कहना है कि खाड़ी का पूर्वी किनारा सीमा रेखा थी। हालांकि, भारत का कहना है कि ये केवल एक सांकेतिक रेखा है।