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कौन थे उत्तर प्रदेश में BSP के इकलौते विधायक उमाशंकर सिंह, जिनका कैंसर से हुआ निधन?
उत्तर प्रदेश में BSP के इकलौते विधायक का निधन

कौन थे उत्तर प्रदेश में BSP के इकलौते विधायक उमाशंकर सिंह, जिनका कैंसर से हुआ निधन?

लेखन गजेंद्र
Aug 06, 2026
11:11 am

क्या है खबर?

उत्तर प्रदेश की 403 सीटों वाली विधानसभा में पूर्व मुख्यमंत्री मायावती की बहुजन समाज पार्टी (BSP) से उमाशंकर सिंह इकलौते विधायक थे, जिनका बुधवार को कैंसर के कारण निधन हो गया। बलिया जिले के रसड़ा सीट से 55 वर्षीय उमाशंकर का ब्रेन ट्यूमर का भी इलाज चल रहा था। उनके निधन पर BSP प्रमुख मायावती और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शोक व्यक्त किया है। कौन थे उमाशंकर, जिनके निधन से प्रदेश विधानसभा में BSP का प्रतिनिधित्व शून्य हो गया है?

शिक्षा

पिता थे पूर्व सैनिक

बलिया में नगरा ब्लॉक के खनवर गांव में जन्में उमाशंकर के पिता घुरहू सिंह पूर्व सैनिक थे। वह किसान से आते हैं। उनकी पत्नी पुष्पा सिंह से उनको एक बेटा और एक बेटी है।

उत्तर प्रदेश विधानसभा की वेबसाइट के मुताबिक, उमाशंकर ने 12वीं तक पढ़ाई की है। हालांकि, कुछ जगह उनको स्नातक भी बताते हैं। उनका लखनऊ में भी उनका आवास है।

वह निर्माण-ठेकेदारी के कामकाज से जुड़े थे, जिससे उनकी गिनती प्रदेश के संपन्न विधायकों में होती थी।

राजनीति

छात्रसंघ का चुनाव लड़ा और जिला पंचायत से सक्रिय राजनीति में प्रवेश

बताया जाता है कि उमाशंकर ने बलिया के सतीश चंद्र कॉलेज से अपनी स्नातक की पढ़ाई की थी और यहां छात्रसंघ चुनाव लड़कर राजनीति में प्रवेश किया था।

वे छात्रसंघ के महामंत्री भी रहे। इसके बाद उन्होंने वर्ष 2002 में जिला पंचायत सदस्य का चुनाव जीता और यहीं से उनकी सक्रिय राजनीति मजबूत हुई।

इसके बाद उमाशंकर 2011 में BSP में शामिल हुए और मायावती के खास विधायकों में जगह बनाई।

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राजनीति

BSP में जगह बनाते ही चुनाव जीते, मोदी लहर से भी निपटे

BSP में शामिल होते ही उमाशंकर को 2012 के विधानसभा चुनाव में रसड़ा से टिकट मिल गया। तब वे समाजवादी पार्टी के सनातन पांडे को 52,000 से अधिक वोट से हराकर पहली बार विधायक बने।

मोदी की लहर भी उनको नहीं रोक पाई और 2017 के चुनाव में भाजपा प्रत्याशी रामइकबाल सिंह को 33,885 मतों से हराकर दूसरी बार विधायक बने।

BSP के सबसे खराब प्रदर्शन के दौरान 2022 में उन्होंने 43.82 प्रतिशत वोट पाकर लगातार तीसरी बार चुनाव जीता।

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छापा

इनकम टैक्स का पड़ा था छापा

राजनीतिक जीवन में सरकारी ठेकों को लेकर काफी विवाद रहा है। बताया जाता है कि 2012 में विधायक बनने के बाद उनके खिलाफ शिकायत की गई कि उन्होंने लोक निर्माण विभाग (PWD) के सरकारी ठेके लिए हैं।

मामले की शिकायत लोकायुक्त में की गई और जांच भी हुई। इस दौरान काफी विवाद हुआ था।

इस साल फरवरी में आयकर विभाग ने उमाशंकर से जुड़े लखनऊ, बलिया और सोनभद्र में उनके घर और कारोबार के ठिकानों पर छापा मारा था।

ट्विटर पोस्ट

उमाशंकर के निधन पर पहुंचीं मायावती

रिश्ता

भाजपा से नजदीकी, मायावती के राखी भाई

उमाशंकर के जितने अच्छे रिश्ते मायावती से थे, उतनी पकड़ भाजपा के अंदर भी थी। मायावती उनको हर साल छोटे भाई की तरह राखी बांधती थीं।

उमाशंकर के समधी भाजपा नेता दिनेश प्रताप सिंह हैं, जिनकी बेटी की शादी उमाशंकर के बेटे से हुई है।

राज्यसभा-चुनाव में उमाशंकर पार्टी लाइन से हटकर भाजपा को वोट दिए हैं, लेकिन मायावती ने उमाशंकर पर कार्रवाई नहीं की, बल्कि उनका निजी फैसला माना।

आयकर छापे के बाद भी उमाशंकर पर सख्ती नहीं हुई।

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