पाकिस्तान: 145 बलूच विद्रोही मारे गए, भारत ने आरोपों का किया खंडन
क्या है खबर?
पाकिस्तान के दक्षिण-पश्चिमी बलूचिस्तान प्रांत में अब तक का सबसे घातक हमला हुआ है, जिसमें कम से कम 190 से अधिक लोगों की जान चली गई है। बलूचिस्तान के मुख्यमंत्री सरफराज बुगती ने रविवार को बताया कि बलूचिस्तान में समन्वित हमलों के बाद पाकिस्तान के सुरक्षा बलों ने 40 घंटों में 145 आतंकवादियों को मार गिराया है, जबकि उसके 45 से अधिक पुलिसकर्मी मारे गए हैं। बुगती ने हमले को हाल का सबसे घातक संघर्ष बताया है।
हमला
31 जनवरी को मारे गए थे 92 विद्रोही
बुगती ने क्वेटा में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि 30 जनवरी को हमले के बाद पाकिस्तान सेना ने कमान संभाली थी और और 31 जनवरी तक कई आतंकी ढेर कर दिए गए थे। उन्होंने बताया कि 31 जनवरी को 92 विद्रोही मारे गए थे, जबकि अब तक हमलों में 17 कानून प्रवर्तन कर्मी और 31 नागरिक मारे गए हैं। पाकिस्तानी सेना ने कहा कि सुरक्षा बलों ने आतंकवादियों द्वारा शहर पर कब्जे के प्रयासों को विफल किया है।
हमला
12 से अधिक जिलो पर हुए थे हमले
पाकिस्तान में प्रतिबंधित बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) ने 30 जनवरी को एक साथ क्वेटा, ग्वादर, मस्तंग, नुश्की, दलबांदिन, पंजगुर, तुंप और पसनी सहित 12 जिलों में हमला किया था। इसके बाद पूरे प्रांत में हड़कंप मच गया, लोग घरों में बंद हो गए और सड़कों पर सन्नाटा पसर गया। हिंसा के दौरान पूरे प्रांत में मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट ठप था। रेल सेवाएं निलंबित कर दी गई थीं। विद्रोहियों ने नागरिकों, जेल, थानों और अर्धसैनिक प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया था।
आरोप
भारत पर लगाया आरोप
BLA ने हमलों की जिम्मेदारी लेते हुए कहा कि उसने हेरोफ या "काला तूफान" नामक एक समन्वित अभियान शुरू किया था, जिसमें प्रांत भर में सुरक्षा बलों को निशाना बनाया गया था। पाकिस्तानी सेना और गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने कहा कि हमलावरों को भारत का समर्थन प्राप्त था। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी हमलों के लिए भारत को जिम्मेदार ठहराते हुए सुरक्षा बलों की प्रशंसा की और कहा कि पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखेगा।
जवाब
भारत ने दिया जवाब
हमलों में भारतीय समर्थन के आरोपों का विदेश मंत्रालय ने खंडन किया है। मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक बयान में कहा, "हम पाकिस्तान के निराधार आरोपों को स्पष्ट रूप से खारिज करते हैं, जो उसकी आंतरिक विफलताओं से ध्यान हटाने की उसकी सामान्य रणनीति हैं। हर बार हिंसक घटना के बाद बेबुनियाद दावे दोहराने के बजाय, उसे क्षेत्र में अपने लोगों की लंबित मांगों पर ध्यान देना चाहिए। दमन, क्रूरता और मानवाधिकार उल्लंघन का उसका इतिहास सर्वविदित है।"