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मणिपुर-मिजोरम से 250 लोगों को इजरायल क्यों ले गई नेतन्याहू सरकार?
पूर्वोत्तर के बेनेई मनाशे समुदाय के 250 लोगों का पहला जत्था इजरायल पहुंच गया है

मणिपुर-मिजोरम से 250 लोगों को इजरायल क्यों ले गई नेतन्याहू सरकार?

लेखन आबिद खान
Apr 24, 2026
02:51 pm

क्या है खबर?

इजरायल ने भारत के पूर्वोत्तर में रह रहे एक खास समुदाय के 250 लोगों की 'घर वापसी' कराई है। ये लोग 23 अप्रैल को तेल अवीव हवाई अड्डे पर पहुंचे, जहां इजरायलियों ने इनका जोरदार स्वागत किया। ये उन 5,800 लोगों का पहला समूह है, जिन्हें इजरायल करीब 250 करोड़ रुपये खर्च कर 'ऑपरेशन विंग्स ऑफ डॉन' के तहत भारत से अपने देश ले जा रहा है। आइए पूरा मामला समझते हैं।

शुरुआत

क्या है 'ऑपरेशन विंग्स ऑफ डॉन?'

दरअसल, इजरायल के मंत्रिमंडल ने पिछले साल नवंबर में इस अभियान को मंजूरी दी थी। इसका उद्देश्य भारत के उत्तर-पूर्व (खासतौर पर मणिपुर और मिजोरम) में रहने वाले 5,800 यहूदियों को अगले 5 साल में इजरायल ले जाकर बसाना है। भारत में रहने वाले इस समुदाय को बेनेई मेनाशे कहा जाता है। योजना के तहत 1,200 लोगों को 2026 में इजरायल ले जाया जाएगा। बाकी लोग 2030 तक इजरायल में बसाए जाएंगे।

लोग

कौन हैं बेनेई मेनाशे?

बेनेई मेनाशे का मतलब है 'मेनाशे के बेटे'। यह समुदाय मानता है कि वे मेनाशे के वंशज हैं, जो बाइबिल के 'खोई हुए जनजातियों' में से एक के पूर्वज थे। दरअसल, बाइबिल के अनुसार, प्राचीन इजरायल के लोग 12 जनजातियों में विभाजित थे। इनमें से 10 का नाम याकूब के पुत्रों और 2 का नाम उनके पोतों- एप्रैम और मनश्शे के नाम पर था। यरुशलम पोस्ट के अनुसार, बेनेई मेनाशे को भारत में शिनलुंग के रूप में जाना जाता है।

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भारत

इजरायल से भारत कैसे आए ये लोग?

722 ईसा पूर्व में असिरिया साम्राज्य ने इजरायल पर हमला किया था और 10 जनजातियों को वहां से निकाल दिया था। ये समुदाय फारस, अफगानिस्तान, तिब्बत और चीन से होते हुए सदियों तक पलायन करने के बाद भारत के उत्तर-पूर्वी भाग में पहुंचा और मणिपुर और मिजोरम में आकर बस गया। माना जाता है कि बेनेई मेनाशे समुदाय में लगभग 10,000 सदस्य हैं, जिनमें से 5,000 भारत तो बाकी इजरायल में हैं।

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वजह

इजरायली सरकार इन्हें वापस क्यों ले जा रही है?

इजरायल दशकों से दुनियाभर में बसे इजरायलियों की घर वापसी कराता रहा है। उसके लिए ऐसे अभियान के धार्मिक मायने भी हैं और ये 'वादा की हुई पवित्र भूमि' में सभी यहूदियों को बसाने की योजना का भी हिस्सा है। इसके अलावा इस कदम को कार्यबल में वृद्धि करने और आबादी का संतुलन बनाने का तरीका भी माना जा रहा है। वहीं, पूर्वोत्तर में रह रहे यहूदी भी धार्मिक वजहों और आय के चलते इजरायल जाना चाहते हैं।

इजरायल

इजरायल में इन लोगों को कहां बसाया जाएगा?

शुरुआत में इस समुदाय को वेस्ट बैंक में बसाया गया था। हालिया सालों में इन्हें उत्तरी इजरायल के शहरों में बसाया जा रहा है। सबसे अहम जगह नॉफ हगालिल है, जो नाजरेथ के पास एक यहूदी-अरब मिश्रित शहर है। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा है कि इन लोगों के स्थानांतरण से उत्तरी और गैलील क्षेत्रों को मजबूती मिलेगी। टाइम्स ऑफ इजरायल के अनुसार, अब इन लोगों को इजरायली नागरिक बनने के लिए धर्म परिवर्तन करना होगा।

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