विदेशों में 400 से अधिक भारतीय मूल के विद्वानों ने चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन पर नाराजगी जताई
भारत में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवालों और उसके खिलाफ विरोध-प्रदर्शनों पर विदेशों में स्थापित भारतीय मूल के विद्वानों ने चिंता जताई है।
हार्वर्ड, स्टैनफोर्ड, ऑक्सफोर्ड, कैम्ब्रिज और मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) जैसे कई जाने-माने विश्वविद्यालयों से जुड़े 27 देशों के 400 से ज्यादा भारतीय मूल के विद्वानों ने एक बयान पर दस्तखत किए हैं।
भारत को अराजकता से बचाओ शीर्षक वाले बयान में भारत के चुनाव आयोग (ECI) के खिलाफ हो रहे विरोध-प्रदर्शनों की आलोचना की गई है।
इन विद्वानों को चिंता है कि ये प्रदर्शन लोकतंत्र में लोगों के भरोसे को ठेस पहुंचा सकते हैं। उनका कहना है कि अगर कोई मतभेद है, तो उसे संवैधानिक तरीकों से सुलझाना चाहिए, न कि सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन करने से।
विपक्ष ने CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की
भारत में विपक्षी INDIA गठबंधन समेत कई नागरिक समूह मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।
वे चुनावों में कथित मतदान अनियमितताओं का आरोप लगा रहे हैं। वहीं, चुनाव आयोग इन आरोपों को खारिज करते हुए अपनी समीक्षा को एक सामान्य प्रक्रिया बता रहा है।
विद्वानों का यह बयान इस बड़ी बहस में एक और कड़ी जोड़ता है कि भारत चुनावी विवादों को कैसे संभालता है और अपनी लोकतांत्रिक संस्थाओं को कितना मजबूत रख पाता है।