मोदी-पुतिन का आर्कटिक प्लान: बदलेगा दुनिया का व्यापारिक नक्शा, यूरोप से 40 प्रतिशत छोटा होगा रास्ता
BRICS शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी और रूसी राष्ट्रपति पुतिन आर्कटिक से जुड़ी महत्वपूर्ण योजनाओं पर विचार-विमर्श करेंगे। इसमें नए व्यापार मार्ग तैयार करने और वहां के संसाधनों का विकास करने जैसे मुद्दे शामिल हैं।
दोनों देश रूस के आर्कटिक क्षेत्र में साथ मिलकर काम करने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने 'आर्कटिक डॉट आरयू' में लिखा है कि कुछ जानकारों का मानना है कि अगले 20 सालों में आर्कटिक, रूस और भारत के बीच सहयोग का एक बड़ा और अहम क्षेत्र बन सकता है।
भारत 2027 में भेजेगा पहला NSR कार्गो
भारत ने 2027 में नॉर्दर्न सी रूट (NSR) के रास्ते अपना पहला कार्गो शिप भेजने की योजना बनाई है। इस नए समुद्री मार्ग से यूरोप तक की यात्रा बहुत तेजी से पूरी हो सकेगी। य
ह स्वेज नहर के मुकाबले करीब 40 फीसदी छोटा रास्ता होगा। दोनों देश रूस के आर्कान्जेल्स्क (आर्खांगेल्स्क) इलाके में मौजूद शिपयार्ड्स (शिपयार्ड्स) में भारत के लिए जहाज बनाने और बंदरगाह सुविधाओं को बेहतर बनाने पर भी ध्यान दे रहे हैं।
इसके अलावा, रूस का आर्कटिक क्षेत्र LNG, निकल, कॉपर और दुर्लभ पृथ्वी धातुओं जैसे कई अनमोल संसाधनों से भरा पड़ा है। ऐसे में दोनों देशों के लिए यहां सहयोग की बड़ी संभावनाएं हैं।
रोसाटॉम भारत के साथ 'आइस-स्ट्रेंथन्ड' जहाजों के लिए करेगा MoU
रूस की परमाणु ऊर्जा कंपनी रोसाटॉम NSR के लिए 'आइस-स्ट्रेंथन्ड' जहाज उपलब्ध कराने के लिए भारत के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर करेगी। जलवायु परिवर्तन के कारण नॉर्दर्न सी रूट का ज्यादा हिस्सा अब जहाजों के लिए खुल रहा है।
यह कदम साफ बताता है कि दोनों देश इस रणनीतिक क्षेत्र में अपनी साझेदारी को मजबूत और कामयाब बनाने के लिए पूरी तरह गंभीर हैं।