नोएडा मजदूर प्रदर्शन: छात्रा आकृति की NSA हिरासत रद्द, DM को देना होगा 5 लाख मुआवजा
क्या है खबर?
नोएडा में मजदूरों के प्रदर्शन के मामले में दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा और सामाजिक कार्यकर्ता आकृति चौधरी को इलाहाबाद हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने आकृति के खिलाफ लगाई गई राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) हिरासत को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने राज्य सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि सरकार की ओर से पेश की गई कहानी 'मनगढ़ंत' है और रिकॉर्ड पर मौजूद तथ्य उसके पक्ष में नहीं दिखते।
टिप्पणी
कोर्ट ने कहा- सरकार के दावे मनगढ़ंत
लाइव लॉ के मुताबिक, मामले की सुनवाई कर रही जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस अचल सचदेव की पीठ ने की।
जजों ने कहा, "आकृति की हिरासत राज्य की ओर से पेश की गई एक 'गढ़ी हुई कहानी' पर आधारित थी। अगर किसी अन्य मामले में उनकी गिरफ्तारी जरूरी न हो तो उन्हें तत्काल रिहा किया जाए।"
साथ ही कोर्ट ने पाया कि पुलिस की ओर से अपनाई गई प्रक्रिया में कई गंभीर खामियां थीं।
गिरफ्तारी
हिंसा से पहले गिरफ्तारी पर उठे सवाल
सुनवाई के दौरान सरकार ने बताया कि प्रदर्शनकारी 11 अप्रैल को इकट्ठा हुए थे। इस पर कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड के अनुसार 11 अप्रैल को कोई हिंसा नहीं हुई थी।
जस्टिस श्रीधरन ने कहा, "यानी 11 तारीख को कोई हिंसा नहीं थी। जो भी हिंसा हुई, वह उनकी गिरफ्तारी के बाद हुई।"
कोर्ट ने सवाल उठाया कि अगर आकृति पहले ही गिरफ्तार हो चुकी थीं तो बाद में हुई हिंसा के लिए उन्हें कैसे जिम्मेदार ठहराया जा सकता है।
मुआवजा
DM को वेतन में से देना होगा मुआवजा
पीठ ने आकृति को 5 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है। साथ ही यह भी जोड़ा कि उक्त रकम उनके खिलाफ की गई कानूनी कार्रवाई में शामिल रहे अधिकारियों के वेतन से वसूली जाएगी।
आकृति के वकील माणिक गुप्ता ने द वायर से कहा, "जहां SHO ने NSA लगाने की शुरुआती सिफारिश की थी, वहीं जिलाधिकारी ने आकृति के खिलाफ एहतियाती हिरासत का आदेश पारित किया था।"
प्रक्रिया
कोर्ट ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठाए गंभीर सवाल
आकृति द्वारा प्रदर्शनकारियों को उकसाने के दावे पर जस्टिस श्रीधरन ने पूछा कि क्या गिरफ्तारी से पहले BNSS की धारा 126 के तहत कोई नोटिस दिया गया था? इस पर सरकार ने न में जवाब दिया।
कोर्ट ने कहा कि धारा 130 के नोटिस के मुताबिक अगर वह बयान देने के लिए तैयार थी, तो उसे गिरफ्तार नहीं किया जा सकता।
कोर्ट में चार्जशीट में विरोधाभासों का मुद्दा भी उठा।
मामला
क्या है मामला?
दरअसल, 13 अप्रैल को नोएडा में मजदूरों का प्रदर्शन हुआ था। इस मामले में लखनऊ के पत्रकार सत्यम वर्मा और आकृति पर NSA लगाया गया था।
दोनों पर मजदूरों को भड़काने और विदेशी फंडिंग जैसे कई आरोप थे। आकृति को 11 अप्रैल को मेट्रो स्टेशन से गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद NSA के तहत उन्हें हिरासत में रखा गया था।
आकृति ने इसके खिलाफ हाई कोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की थी।