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काई क्यूई कौन हैं, जिन्हें माना जाता है शी जिनपिंग का दाहिना हाथ?
प्रधानमंत्री मोदी के साथ काई क्यूई (फाइल तस्वीर)

काई क्यूई कौन हैं, जिन्हें माना जाता है शी जिनपिंग का दाहिना हाथ?

लेखन आबिद खान
Sep 12, 2026
01:17 pm

क्या है खबर?

BRICS शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भारत आ चुके हैं। वे अपने साथ एक बड़ा प्रतिनिधिमंडल भी लेकर आए हैं। इसमें सबसे ज्यादा चर्चा जिनपिंग के करीबी सहयोगी काई क्यूई की है। उन्हें जिनपिंग के बाद चीन में दूसरा सबसे ताकतवर शख्स माना जाता है। अक्सर उन्हें जिनपिंग का दाहिने हाथ भी कहा जाता है। आइए काई के बारे में जानते हैं।

परिचय

कौन हैं काई?

काई चीन की पोलित ब्यूरो की स्थायी समिति के सदस्य और जिनपिंग के चीफ ऑफ स्टाफ हैं। माओ युग के बाद दोनों पदों पर आसीन होने वाले वे पहले व्यक्ति हैं। वे पार्टी की विचारधारा तय करने वाले संस्थान सेंट्रल आइडियोलॉजी स्कूल के भी प्रमुख हैं।

चीन के फुजियान प्रांत के रहने वाले काई की जिनपिंग से पहली मुलाकात 1980 के दशक में हुई थी। दोनों एक-दूसरे के साथ 2 दशक से ज्यादा समय तक काम कर चुके हैं।

पद

कम्युनिस्ट पार्टी में तेजी से हुआ काई का उदय

कम्युनिस्ट पार्टी में काई का उदय 2017 में तब तेजी से हुआ, जब जिनपिंग ने कम्युनिस्ट पार्टी नेता के रूप में अपना दूसरा कार्यकाल शुरू किया। पहले काई को बीजिंग में कम्युनिस्ट पार्टी के प्रमुख के पद पर नियुक्त किया गया।

इसके कुछ ही महीनों बाद उन्हें पार्टी के दूसरे सबसे बड़े निर्णय लेने वाला निकाय पोलित ब्यूरो में जगह मिली। खास बात थी कि काई को केंद्रीय समिति के निचले स्तर के बजाय सीधे पोलित ब्यूरो में चुना गया।

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मौजूदगी

कई अहम मौकों पर जिनपिंग के साथ आए नजर

लंबे समय तक पर्दे के पीछे रहकर काम करने वाले काई हाल के महीनों में अंतरराष्ट्रीय मंचों पर दिखाई दिए हैं।

पिछले साल तियानजिन में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) बैठक के दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी।

2025 में दक्षिण कोरिया में जिनपिंग और डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात के दौरान भी वे मौजूद थे।

इस साल जब ट्रंप चीन पहुंचे थे, तो सबसे पहले उनकी मुलाकात काई से ही हुई थी।

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आलोचना

इन वजहों से होती है काई की आलोचना

काई कभी अपने मुखर विचारों और पारदर्शी शासन के समर्थन के लिए जाने जाते थे। चीनी सोशल मीडिया पर पहले वे काफी सक्रिय थे।

हालांकि, 2014 में पार्टी में एक अहम केंद्रीय पद मिलने के बाद उन्होंने अपना सोशल मीडिया अकाउंट डिलीट कर दिया।

काई ने अवैध प्रवासी आवासों के खिलाफ एक अभियान में 'खून बहाने' की कसम खाई थी। इसे लेकर उनकी व्यापक आलोचना हुई और लोगों ने उनके इस्तीफे की मांग की।

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