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लंदन में तिलक लगाने पर 8 साल के हिंदू छात्र के साथ भेदभाव, छोड़ना पड़ा स्कूल
लंदन के स्कूल में हिंदू छात्र को धार्मिक भेदभाव के कारण स्कूल छोड़ना पड़ा (प्रतीकात्मक तस्वीर)

लंदन में तिलक लगाने पर 8 साल के हिंदू छात्र के साथ भेदभाव, छोड़ना पड़ा स्कूल

लेखन गजेंद्र
Jan 20, 2026
11:45 am

क्या है खबर?

लंदन के एक प्राथमिक विद्यालय में धार्मिक पहचान के कारण एक 8 वर्षीय छात्र को इतना परेशान किया गया कि उसने अपना स्कूल छोड़ दिया। विकर्स ग्रीन प्राइमरी स्कूल में पढ़ने वाले छात्र ने अपने माथे पर हिंदू धार्मिक चिन्ह 'तिलक' लगाया था, जिसको लेकर स्कूल में सवाल उठ रहे थे। घटना को लेकर ब्रिटिश हिंदू और भारतीय समुदाय का प्रतिनिधित्व करने वाली सामाजिक आंदोलन और वकालत संस्था INSIGHT UK ने धार्मिक भेदभाव पर गंभीर चिंता व्यक्त की है।

घटना

क्या है मामला?

NDTV के मुताबिक, लंदन के स्कूल में पढ़ने वाला छात्र जब तिलक लगाकर स्कूल पहुंचा तो उससे आपत्तिजनक व्यवहार किया गया। स्थिति तब और बिगड़ गई, जब प्रधानाध्यापक ने अवकाश के दौरान बच्चे पर कड़ी नजर रखना शुरू कर दिया, जिसे बच्चे ने डराने वाला व्यवहार समझा। आरोप है कि बच्चे को स्कूल में जिम्मेदारी के पदों से उसकी धार्मिक मान्यताओं के कारण वंचित कर दिया गया, जो ब्रिटेन के समानता अधिनियम 2010 के तहत धार्मिक भेदभाव का उल्लंघन है।

आपत्ति

छात्र के माता-पिता ने भी स्कूल से बात की

मामले को लेकर छात्र के माता-पिता ने अन्य हिंदू अभिभावकों के साथ मिलकर प्रधानाध्यापक और स्कूल प्रशासकों से बात की और हिंदू रीति-रिवाजों के धार्मिक महत्व के बारे में समझाया। हालांकि, अभिभावकों से बातचीत के बजाय स्कूल ने अस्वीकार्य जवाबों के साथ इसे खारिज कर दिया। स्कूल प्रशासन का कहना है कि हिंदू धर्म में तिलक लगाना अनिवार्य नहीं कहा गया है, ऐसे में वे इसकी अनुमति नहीं देंगे, जबकि स्कूल में मुसलमानों के लिए हिजाब की छूट है।

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विरोध

शिक्षा प्राधिकरण के सामने उठाया मुद्दा

INSIGHT UK ने स्थानीय शिक्षा प्राधिकरण के सामने भी यह मुद्दा उठाया है और कहा कि किसी भी बच्चे को उसके धर्म के कारण अलग-थलग या असहज महसूस नहीं कराया जाना चाहिए। संस्था ने बताय कि विकर्स ग्रीन प्राइमरी स्कूल में कथित भेदभाव के परिणामस्वरूप कम से कम 4 हिंदू बच्चों को संस्था से निकाल लिया गया है। इससे स्कूलों में समावेशिता और धार्मिक स्वतंत्रता के बारे में व्यापक चिंताएं बढ़ गई हैं।

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