फ्रांस में छात्र प्रदर्शन के दौरान पुलिस पर गंभीर चोट पहुंचाने का आरोप, मानवाधिकार संगठन बोले- 'युद्ध जैसे जख्म'
फ्रांस में बेहतर शिक्षा की मांग कर रहे छात्रों के प्रदर्शन को पुलिस रोकने के लिए बर्बर कार्रवाई कर रही है, जिसकी निंदा की जा रही है।
प्रदर्शन के दौरान किशोरों को गंभीर चोटें पहुंचाने के आरोप में फ्रांसीसी पुलिस निशाने पर आ गई है। सड़कों पर छात्रों को बुरी तरह पीटा जा रहा है और आंसू गैस के गोले दागे जा रहे है।
मानवाधिकार संगठनों और वकीलों का कहना है कि स्टन ग्रेनेड जैसे विस्फोटक हथियारों से लगी ये चोटें, किसी स्कूल के प्रदर्शन में लगने वाली सामान्य चोटों से कहीं ज्यादा, युद्ध में हुए घावों जैसी लगती हैं।
पुलिस हिंसा की 36 आंतरिक जांच
अब तक पुलिस की बर्बरता को लेकर 36 अंदरूनी जांच शुरू की जा चुकी हैं। इनमें ऐसे मामले भी हैं जहां किशोरों ने अपना एक हाथ खो दिया या उनकी एक आंख की रोशनी चली गई। कानूनी कार्रवाई भी शुरू हो गई है।
एक पुलिसकर्मी पर गंभीर मारपीट का आरोप लगा है। स्टन ग्रेनेड से जुड़ी घटनाओं के बाद एक आपराधिक शिकायत भी दर्ज हुई है।
इसके अलावा, एक ग्रेनेड लॉन्चर वाले मामले में हत्या के प्रयास की भी अलग से कानूनी शिकायत दर्ज कराई गई है। भीड़ को नियंत्रित करने के ऐसे सख्त तरीकों के इस्तेमाल का मानवाधिकार संगठन अब पुरजोर विरोध कर रहे हैं।