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भूकंप या भूस्खलन, नेपाल में अचानक आई बाढ़ की क्या है वजह?
नेपाल बाढ़ में हताहतों का आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है

भूकंप या भूस्खलन, नेपाल में अचानक आई बाढ़ की क्या है वजह?

लेखन आबिद खान
Aug 27, 2026
11:26 am

क्या है खबर?

बीते दिन नेपाल-तिब्बत सीमा से लगे इलाकों में अचानक आई बाढ़ में अब तक 165 लोगों की मौत हो गई है और 1,400 से ज्यादा लापता हैं। इनमें 300 से ज्यादा भारतीय हैं। घटना के बाद बड़े पैमाने पर बचाव अभियान जारी है। हालांकि, अभी तक अचानक आई इस बाढ़ के पीछे की स्पष्ट वजह नहीं पता है, लेकिन विशेषज्ञ भूस्खलन या भूकंप को इसका कारण मान रहे हैं। आइए जानते हैं अब तक क्या-क्या पता है।

भूकंप

क्या भूकंप की वजह से आई बाढ़?

शुरुआत में खबर आई थी कि नेपाल-चीन सीमा के पास भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) ने इसे 4.4 तीव्रता का भूकंप बताया था।

नेपाल के विदेश मंत्री ने भी कहा था कि भूस्खलन से कुछ ही समय पहले तिब्बत-नेपाल सीमा पर भूकंप आया था। उन्होंने कहा था कि भूकंप के कारण भूस्खलन हुआ होगा, जिससे नदी का रास्ता रुक गया और पानी इकट्ठा होता गया, जो बाद में तेजी से बहने लगा।

अमेरिका

अमेरिकी भूवैज्ञानिकों ने भूकंप का दावा खारिज किया

बाद में USGS ने कहा कि यह भूकंप नहीं था, बल्कि पहाड़ से हुआ भूस्खलन इतना खतरनाक था कि उससे भूकंप जैसा झटका पैदा हुआ। यानी भूकंप नहीं आया था, बल्कि भूस्खलन से भूकंप जैसा झटका महसूस हुआ।

वहीं, काठमांडू स्थित इंटरनेशनल सेंटर फॉर इंटीग्रेटेड माउंटेन डेवलपमेंट ने एक प्रारंभिक आकलन के बाद कहा कि बर्फ और चट्टान के हिमस्खलन ने ल्हेंदे नदी का रास्ता रोक दिया और इस तरह बाढ़ की घटना को जन्म दिया।

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हिमस्खलन

क्या हिमस्खलन है जिम्मेदार?

नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण के भूविज्ञानी प्रकाश पोखरेल ने सैटेलाइट तस्वीरों के हवाले से बताया कि नेपाल में बर्फ और चट्टान के हिमस्खलन के कारण अचानक बाढ़ आई।

न्यूयॉर्क टाइम्स से बात करते हुए कनाडा के कैलगरी विश्वविद्यालय के भूविज्ञानी डैनियल शुगार ने कहा, "ऐसा लगता है कि इस क्षेत्र में एक ग्लेशियर अचानक टूट गया, जिससे वह घाटी की तलहटी तक लगभग एक किलोमीटर की ऊर्ध्वाधर दूरी तक गिर गया।"

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विशेषज्ञ

क्या कह रहे हैं विशेषज्ञ?

स्कॉटलैंड के डंडी विश्वविद्यालय में हिमनद विज्ञानी साइमन कुक ने न्यूयॉर्क टाइम्स से कहा, "यह बर्फ का एक बड़ा टुकड़ा है, जो पहाड़ की ऊंचाई पर जमा है और इसमें अपार ऊर्जा है। जब यह टूटता है, तो गिरने की प्रचंड शक्ति बर्फ को एक खतरनाक, तेजी से बहने वाले मिश्रण में बदल देती है। वह बर्फ चूर-चूर होकर पानी में बदल जाती है।"

विशेषज्ञ इस घटना को कुछ हद तक जलवायु परिवर्तन से भी जोड़ रहे हैं।

घटना

कैसी घटी होगी घटना?

कोलंबिया विश्वविद्यालय के लैमोंट-डोहर्टी अर्थ ऑब्जर्वेटरी के गोरान एकस्ट्रॉम ने ABC न्यूज से बात करते हुए बताया कि दिन के दौरान पर्वतीय दर्रे में भूस्खलन हुआ, जिससे हिमालय में स्थित एक विशाल ग्लेशियर या ग्लेशियर के कुछ हिस्से बह गए।

उन्होंने कहा, "इससे चट्टानें पहाड़ से नीचे गिरीं, जिससे अत्यधिक ऊर्जा उत्पन्न हुई और ग्लेशियर पिघल गया, जो संभवतः पहाड़ की तलहटी में इतना अधिक पानी गिरने का कारण हो सकता है।"

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