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जापान में क्यों हो रही इतनी बर्फबारी, जिससे टूट गया 81 साल का रिकॉर्ड?
जापान में बर्फबारी के कारण सड़कों पर यातायात भी प्रभावित हुआ है

जापान में क्यों हो रही इतनी बर्फबारी, जिससे टूट गया 81 साल का रिकॉर्ड?

लेखन गजेंद्र
Feb 02, 2026
12:11 pm

क्या है खबर?

जापान इस समय कड़ाके की ठंड से गुजर रहा है। यहां के उत्तर पूर्वी हिस्से में इतनी बर्फबारी हो रही है, जिससे लोगों का जीवन अस्त-व्यस्त है। सबसे अधिक बर्फबारी पूर्वोत्तर प्रांत आओमोरी के आओमोरी शहर में हुई है, जहां 81 साल का रिकॉर्ड टूट गया है। इसके अलावा 6 से 7 शहर भी प्रभावित हैं। रिकॉर्ड तोड़ बर्फबारी से अब तक 28 लोगों की मौत की सूचना है। कई प्रांतों में आपातकाल घोषित है।

असर

किन प्रांतों में कितनी बर्फबारी?s

जापान में जनवरी में बर्फबारी होती है, लेकिन इस साल ज्यादा असर दिखा है। होक्काइडो प्रांत के सप्पोरो में 112 सेमी से अधिक बर्फ गिरी है। यहां के ओबिहिरो, असाहिकावा आदि इलाके भी प्रभावित हैं। आओमोरी शहर में 183 सेमी बर्फबारी 1945 के बाद सबसे अधिक है, जिससे 81 साल पुराना रिकॉर्ड टूट गया। हक्कोदा पर्वत क्षेत्र पर 4.5 मीटर बर्फ गिरी है। निगाता प्रांत, नागानो प्रांत, यामागाता और फुकुशिमा प्रांत में भी जमकर बर्फबारी हो रही है।

असर

बर्फबारी का भारी असर, अब तक 28 की मौत

बर्फबारी की वजह से होक्काइडो में 500 से ज्यादा रेल सेवाएं निलंबित कर दी गईं, जबकि 1.3 लाख लोग प्रभावित हुए हैं। न्यू चिटोज एयरपोर्ट पर 56 उड़ानों को रद्द कर दिया गया, जिससे 7,000 लोग प्रभावित हैं। यहां सड़कें और एक्सप्रेसवे को आंशिक तौर पर बंद किया गया है। निगाता प्रांत में 12, अकिता प्रांत में आठ और होक्काइडो द्वीप में 5 लोगों की जान गई है। फुकुई में 15 घायल हुए और 32 कार हादसे हुए हैं।

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मदद

सेना की मदद मांगी गई

सबसे अधिक प्रभावित आओमोरी प्रांत ने छतों से बर्फ हटाने के लिए देश की आत्मरक्षा बलों से सहायता मांगी है। यहां के गर्वनर सोइचिरो मियाशिता ने "आपातकाल" घोषित कर दिया है। प्रांत की सरकार ने 2005 के बाद पहली बार बलों की मदद मांगी है, जिससे अकेले रहने वाले बुजुर्गों की रक्षा हो सके। सरकार के मुताबिक, बर्फ हटाने के दौरान छतों से गिरने से 90 से अधिक लोग घायल हुए, जबकि कुछ की मौत हो गई है।

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कारण

जापान में इन प्रांतों में क्यों हो रही इतनी बर्फबारी?

जापान के जिन प्रांतों में अधिक बर्फबारी हो रही है, उसमें से अधिकतर जापान सागर तट वाले इलाकों में है, जहां 'सी ऑफ जापान इफेक्ट' या 'जापान सागर प्रभाव' अधिक है। वैसे तो, इसे प्राकृतिक मौसमी घटना माना जा रहा है, लेकिन इस बार इसने रिकॉर्ड तोड़ा है। सर्दियों में साइबेरिया-मंगोलिया के ऊपर मजबूत हाई प्रेशर सिस्टम बनने से बहुत ठंडी और शुष्क हवा (तापमान शून्य से 20 डिग्री नीचे) दक्षिण और जापान की ओर आती है।

ट्विटर पोस्ट

आओमोरी में बर्फबारी के बीच गुजरती ट्रेन

जलवायु

कहीं ये जलवायु परिवर्तन का असर तो नहीं?

विशेषज्ञ मानते हैं कि पृथ्वी के गर्म होने से भारी बर्फबारी हो सकती है और जापान सागर जैसे गर्म महासागर, वायुमंडल में अधिक पानी वाष्पित करते हैं। यहां की त्सुशिमा धारा उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों से जापान सागर में बहने वाली एक गर्म समुद्री धारा है, जो हवा का तापमान गिरने पर पानी गर्म बनाती है। जापान सागर वैश्विक औसत-दर से दोगुना गर्म हो रहा है, जिसका अर्थ है त्सुशिमा धारा 1945 की तुलना में अधिक ऊष्मीय ऊर्जा बहा रही है।

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