सऊदी अरब में शिया समुदाय के प्रदर्शन और अंतिम संस्कार में शामिल होने पर नाबालिग को मौत की सजा
सऊदी अरब की शीर्ष अदालत ने नाबालिग यूसुफ अल-मनासिफ की मौत की सजा को बरकरार रखा है। यूसुफ को 2017 में गिरफ्तार किया गया था।
उन पर शिया अल्पसंख्यक द्वारा धार्मिक स्वतंत्रता के लिए किए गए विरोध प्रदर्शनों में शामिल होने और सऊदी अधिकारियों द्वारा विरोध प्रदर्शन माने जाने वाले अंत्येष्टि समारोहों में भाग लेने सहित कई अपराधों का आरोप है।
उन्हें आतंकवाद से संबंधित मामलों के लिए स्थापित एक गुप्त न्यायाधिकरण, विशेष आपराधिक न्यायालय द्वारा दोषी ठहराया गया और मृत्युदंड की सजा सुनाई गई है।
हालांकि, जिस समय यूसुफ ने यह कथित अपराध किए, उस समय वह नाबालिग थे और उम्र 15 से 17 साल के बीच थी।
सऊदी मामले में यातना के आरोप
यूसुफ के इस मामले ने गुस्से को और भड़का दिया है। खबरें हैं कि उसे यातना दी गई और दबाव में उससे इकबालिया बयान लिया गया।
हैरानी की बात तो यह है कि गिरफ्तारी के 5 साल बाद तक उसे अपने सरकारी वकील से मिलने नहीं दिया गया। यह सब 2020 के एक शाही फरमान के खिलाफ है।
उस फरमान में नाबालिगों द्वारा किए गए अपराधों के लिए फांसी की सजा खत्म करने की बात कही गई थी। लेकिन मानवाधिकार समूहों का कहना है कि 2015 से अब तक सऊदी अरब में कम से कम 17 ऐसे लोगों को फांसी दी जा चुकी है, जो कथित अपराध करते समय नाबालिग थे।
संयुक्त राष्ट्र (UN) सऊदी अरब से अपनी ही नीतियों का पालन करने और नाबालिगों को फांसी न देने की अपील कर रहा है।