इजरायल ने नवंबर 2025 में ही बना ली थी अयातुल्ला खोमेनई की हत्या की योजना
क्या है खबर?
इजरायली अधिकारियों के अनुसार, ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या की योजना हाल ही में पश्चिम एशिया में चले आ रहे तीव्र सैन्य अभियान से कहीं पहले ही तैयार की जा चुकी थी। इजरायल के रक्षा मंत्री इसराइल काट्ज ने कहा कि खामेनेई की हत्या का निर्णय अमेरिका के सहयोग के बिना नवंबर 2025 में ही ले लिया गया था। बता दें कि अमेरिकी-इजरायल हमले में 28 फरवरी को खामेनेई की मौत हो गर्ठ थी।
दावा
इजरायल के रक्षा मंत्री ने क्या किया दावा?
रक्षा मंत्री काट्ज ने जेरूसलम पोस्ट से कहा, "प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने नंवबर 2025 में अधिकारियों के साथ एक संक्षिप्त गोपनीय बैठक के दौरान ही खामेनेई की हत्या का लक्ष्य निर्धारित कर लिया था। उस समय ऑपरेशन लगभग 2026 के मध्य में शुरू करने का निर्णय किया गया था।" काट्ज ने कहा कि यह योजना अंततः अमेरिका के साथ साझा की गई और ईरान में विरोध प्रदर्शन शुरू होने के बाद जनवरी के आसपास इसे आगे बढ़ाया गया।
योजना
शुरुआती योजनाओं में शामिल नहीं थे ट्रंप
काट्ज ने यह भी खुलासा किया कि इजराइल ने शुरू में स्वतंत्र रूप से कार्रवाई करने की तैयारी की थी और उसने तुरंत अमेरिका के साथ योजना साझा नहीं की थी। विरोध प्रदर्शनों और बढ़ते जोखिमों के आकलन के बाद ही इजरायल और अमेरिका ने अधिक निकटता से समन्वय करना शुरू किया। उन्होंने कहा कि दोनों देश ईरान को परमाणु और मिसाइल क्षमता से वंचित करने और क्षेत्र में तेहरान के प्रभाव को सीमित करने की आवश्यकता पर सहमत हैं।
दबाव
किसी भी पक्ष ने खामेनेई की हत्या के लिए नहीं डाला था दबाव- काट्ज
काट्ज ने इस बात से इनकार किया कि किसी भी पक्ष पर इस निर्णय के लिए दबाव डाला गया था और कहा कि आगे बढ़ने का निर्णय प्रत्येक सरकार के अपने सुरक्षा आकलन पर आधारित था। हालांकि इस हत्या ने जवाबी हमलों और बढ़ते तनावों से जुड़े एक व्यापक क्षेत्रीय संघर्ष को जन्म दिया है। इजरायली अधिकारी इस ऑपरेशन को ईरान के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों से उत्पन्न खतरे को बेअसर करने की रणनीति का हिस्सा बता रहे हैं।
हमला
इजरायल और अमेरिका ने 28 फरवरी को किया था हमला
दरअसल, इजरायल ने गत 28 फरवरी को अमेरिका की सेना के साथ मिलकर ईरान पर हमला बोल दिया था। उसने राजधानी तेहरान के अलावा करमानशाह, लोरेस्टन, तबरीज, इस्फहान और करज शहरों 30 से अधिक जगहों पर हमले किए थे। तेहरान में सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई के कार्यालय को भी निशाना बनाया गया था, जिसमें खामेनेई समेत उनकी बेटी, दामाद, पोती और बहू की भी मौत हो गई। उसके बाद ईरान के जवाबी कार्रवाई शुरू करते ही संघर्ष भड़क गया।