LOADING...
क्या ईरान को रूस और चीन से मिले हथियारों से युद्ध में मिल रही है मदद?
क्या ईरान को रूस और चीन से मिले हथियारों से युद्ध में मिल रही है मदद?

क्या ईरान को रूस और चीन से मिले हथियारों से युद्ध में मिल रही है मदद?

Mar 03, 2026
01:32 pm

क्या है खबर?

इजरायल और अमेरिका के संयुक्त रूप से हमला करने के बाद ईरान ने भी जवाबी हमले किए हैं। इसमें उसने इजरायल के साथ पश्चिम एशियाई देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य सुविधाओं को भी निशाना बनाया है। इसके लिए उसने मिसाइलों, ड्रोन्स और लड़ाकू विमानों को इस्तेमाल किया है। उसके पास इन हथियारों की आपूर्ति का प्रमुख जरिया चीन और रूस रहे हैं। ऐसे में आइए जानते हैं किस तरह से ईरान के लिए रूस और चीन मददगार रहे हैं।

निर्भरता

आधुनिक हथियारों के लिए रूस और चीन पर निर्भर रहा है ईरान

दुनिया में सबसे अधिक हथियार बनाने वालों में शामिल ईरान आधुनिक हथियारों के लिए दूसरे देशों पर निर्भर रहता है। चीन और रूस उसके बड़े दोस्त माने जाते हैं। इन दोनों देशों के साथ ईरान का रिश्ता सिर्फ हथियार बेचने-खरीदने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें तकनीक साझा करना, एक-दूसरे को मदद करना और संयुक्त उत्पादन भी शामिल है। रूस उसे विमान और एंटी एयरक्राफ्ट मिसाइल देता है, जबकि चीन ज्यादातर पार्ट्स और केमिकल्स देता है।

संबंध

रूस और ईरान के हथियार संबंध कितने पुराने हैं?

रूस और ईरान के बीच हथियारों का संबंध बहुत पुराना है, लेकिन 2022 में यूक्रेन युद्ध के बाद यह और मजबूत हुआ। ईरान ने रूस को हजारों शाहेद-136 ड्रोन दिए जो रूस अब खुद गेरान-2 नाम से बनाता है। रूस इसके बदले ईरान को आधुनिक हथियार दे रहा है। साल 2025 में दोनों देशों के बीच 20 साल की रणनीतिक साझेदारी की संधि भी हुई थी, जिसमें एक-दूसरे से हथियारों की खरीद-बिक्री के साथ तकनीकी मदद करना भी शामिल है।

Advertisement

समझौता

ईरान और रूस के बीच हुआ खास समझौता

हाल ही में दिसंबर 2025 में रूस ने ईरान को 500 वेरबा मैन-पोर्टेबल वायु रक्षा प्रणाली और 2,500 मिसाइलें देने का विशेष समझौता किया था, जिसकी कीमत लगभग 50 करोड़ यूरो (लगभग 5,300 करोड़ रुपये) है। ये डिलीवरी 2027 से 2029 तक होंगी, लेकिन कुछ पहले भी पहुंच चुकी हैं। इसके अलावा ईरान को रूस Su-35 फाइटर जेट्स (48 की डील), MI-28 हेलीकॉप्टर और YAK-130 ट्रेनर एयरक्राफ्ट भी दे रहा है।

Advertisement

चीन

चीन क्यों और किस तरह ईरान को देता है हथियार?

ईरान को चीन सीधे हथियार बेचना 2005 के बाद बंद कर चुका है, लेकिन फिर भी दोनों के बीच गहरा संबंध है। चीन ज्यादातर दोहरे उपयोग वाले सामान देता है, जो आम जीवन और हथियार बनाने दोनों में काम आती हैं। उदाहरण के लिए चीन ने ईरान को हजारों टन सोडियम परक्लोरेट भेजा जो बैलिस्टिक मिसाइल बनाने के लिए जरूरी है। इससे ईरान सैकड़ों मिसाइलें बना सकता है। इसी के दम पर ईरान में मिसाइलों का भंडार तैयार किया है।

बातचीत

चीन और ईरान सुपरसोनिक एंटी-शिप मिसाइल समझौत पर कर रहे बातचीत

चीन और ईरान वर्तमान में CM-302 सुपरसोनिक एंटी-शिप मिसाइल समझौते पर बातचीत कर रहे हैं। ईरान को चीन ड्रोन के इंजन, रडार और इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स भी देता है। चीन उससे सस्ता तेल खरीदता है। बदले में ये तकनीकी मदद देता है। दोनों देश हर साल संयुक्त नौसेना अभ्यास भी करते हैं जिसमें रूस भी शामिल होता है। चीन का मकसद है कि अमेरिका के दबाव के बावजूद ईरान मजबूत रहे और मध्य पूर्व में उसका प्रभाव बढ़े।

हथियार

चीन और रूस से ईरान को कितने हथियार सीधे मिलते हैं?

ईरान को रूस से मुख्य रूप से 5-6 प्रकार के बड़े हथियार सीधे मिलते हैं। इनमें Su-35 फाइटर जेट्स, वेरबा शोल्डर फायर एंटी-एयरक्राफ्ट मिसाइल, S-300 वायु रक्षा प्रणाली, MI-28 अटैक हेलीकॉप्टर और याक-130 ट्रेनर शामिल हैं। रूस ने पहले भी ईरान को मिसाइल और सेंसर दिए हैं। चीन से सीधे हथियार कम मिलते हैं, लेकिन CM-302 एंटी-शिप मिसाइल का सौदा लगभग पक्का हो चुका है। सबसे ज्यादा बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन बनाने के पार्ट्स और केमिकल्स आते हैं।

उत्पादन

क्या चीन, रूस और ईरान संयुक्त उत्पादन भी करते हैं?

संयुक्त उत्पादन का सबसे बड़ा उदाहरण रूस और ईरान के बीच है। ईरान ने रूस को शाहेद ड्रोन की तकनीद दी। अब रूस खुद ये ड्रोन बनाता है। इससे दोनों देशों को फायदा हो रहा है। ईरान को रूस से नई तकनीक मिल रही है और रूस को सस्ते ड्रोन मिल रहे हैं। चीन के साथ संयुक्त उत्पादन कम है लेकिन तकनीक का आदान-प्रदान अधिक है। चीन मिसाइल बनाने के पार्ट्स देता है। ईरान उनसे मिसाइलें बनाता है।

उम्मीद

चीन, रूस और ईरान के संबंधों से भविष्य में क्या है उम्मीद?

चीन और रूस के साथ ईरान का हथियार संबंध भविष्य में और मजबूत होने वाला है क्योंकि तीनों देश अमेरिका के खिलाफ एक साथ खड़े हैं। रूस से ईरान को और ज्यादा लड़ाकू विमान और सुरक्षा प्रणाली मिल सकती है, जबकि चीन मिसाइल और ड्रोन उपकरण की आपूर्ति बढ़ा सकता है। प्रतिबंधों के कारण यह सब गुप्त रूप से होता है। यह रिश्ता न सिर्फ ईरान को मजबूत बनाता है बल्कि पूरे मध्य पूर्व की सुरक्षा को प्रभावित करता है।

Advertisement