ईरान-अमेरिका के बीच आज स्विट्जरलैंड में वार्ता, परमाणु समझौते और लेबनान में युद्धविराम पर होगी चर्चा
क्या है खबर?
स्विट्जरलैंड में आज ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत होने जा रही है। इसमें शामिल होने के लिए अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस रवाना हो चुके हैं। वहीं, मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे कतर और पाकिस्तान के प्रतिनिधि पहले से स्विट्जरलैंड में मौजूद हैं। ईरान के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व संसद अध्यक्ष मोहम्मद बगेर गालिबाफ कर रहे हैं और इसमें विदेश मंत्री अब्बास अराघची भी शामिल हैं। शांति समझौते के भविष्य को लेकर ये वार्ता बेहद अहम मानी जा रही है।
बयान
वेंस बोले- परमाणु मुद्दे और स्थिरता पर हमारा ध्यान
वेंस ने स्विट्जरलैंड रवाना होने से पहले कहा, "वाशिंगटन को परमाणु मुद्दे और क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने के प्रयासों दोनों पर प्रगति हासिल करने की उम्मीद है। ये 2 प्रमुख मुद्दे हैं जिन पर हम ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।" वहीं, पाकिस्तानी प्रधानमंत्री कार्यालय के बयान के अनुसार, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर तकनीकी स्तर की चर्चाओं में भाग लेने के लिए इस्लामाबाद से रवाना हो चुके हैं।
मुद्दे
किन मुद्दों पर होगी चर्चा?
रिपोर्ट के मुताबिक, चारों देशों के प्रतिनिधिमंडल मध्य पूर्व के व्यापक संकट को हल करने के लिए 60-दिवसीय रोडमैप, युद्धविराम ढांचे के कार्यान्वयन और भविष्य के परमाणु समझौते पर प्रगति पर ध्यान केंद्रित करेंगे। समाचार एजेंसी ANI ने बताया कि दक्षिणी लेबनान में जारी शत्रुता के बीच दोनों पक्षों के वार्ताकार इस मुद्दे को सुलझाने पर सहमत हुए हैं। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि प्रतिनिधिमंडल समझौते के तहत दूसरे पक्ष की प्रतिबद्धताओं के कार्यान्वयन की मांग करेगा।
लेबनान
लेबनान संघर्ष पर होगा आपातकाली सत्र
पहले दिन इजरायल और लेबनान के बीच संघर्ष पर केंद्रित एक आपातकालीन सत्र भी होगा। ये अमेरिकी रणनीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव को दर्शाता है, क्योंकि न तो इजरायल, न ही हिजबुल्लाह और न ही लेबनानी सरकार स्विट्जरलैंड वार्ता का हिस्सा हैं। ईरान का कहना है कि युद्धविराम की शर्तों पर लेबनान समेत सभी मोर्चों पर जंग रोकना शामिल है। वहीं, इजरायल लगातार लेबनान पर हमले किए जा रहा है।
होर्मुज
होर्मुज जलडमरूमध्य पर भी विवाद अनसुलझा
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर 60 दिनों के भीतर कोई अंतिम समझौता नहीं हुआ तो होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी टोल लगाए जा सकते हैं। वहीं, युद्धविराम लागू होने के बाद 2 बार ईरान ने इसे बंद करने का दावा किया है। इसके पीछे लेबनान पर जारी इजरायली हमलों को वजह बताया गया है। ईरान का कहना है कि लेबनान पर इजरायली हमले युद्धविराम शर्तों का उल्लंघन हैं।