ईरान का वो हथियार, जो अमेरिका को दे सकता है 'दिल का दौरा'?
क्या है खबर?
ईरान ने अमेरिका और इजरायल के खिलाफ युद्ध में नया हथियार इस्तेमाल करने की धमकी दी है और दावा किया है कि इससे दुश्मन को दिल का दौरा पड़ सकता है। यह चेतावनी ऐसे समय में आई है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के उस प्रस्ताव को खारिज कर दिया, जिसमें होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने के बदले अमेरिकी नाकेबंदी हटाने की बात कही गई थी। आइए ईरान के इस हथियार के बारे में जानते हैं।
बयान
नए हथियार के बारे में ईरान ने क्या कहा?
ईरान की नौसेना के कमांडर रियर एडमिरल शहराम ईरानी ने सरकारी मीडिया से बातचीत में कहा कि इस्लामिक गणराज्य बहुत जल्द दुश्मन ताकतों का सामना ऐसे हथियार से कराएगा, जिससे वे बेहद डरते हैं। उन्होंने कहा, "यह हथियार उनके बेहद करीब है, उम्मीद है उन्हें दिल का दौरा नहीं पड़ेगा। दुश्मनों ने सोचा था कि वे कम समय में अपने मकसद में कामयाब हो जाएंगे, लेकिन अब यह सोच सैन्य अकादमियों में मजाक बन गई है।"
हथियार
किस हथियार की बात कर रहा है ईरान?
विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान जिस हथियार की बात कर रहा है, वह संभवत: हूट सुपर टॉरपीडो हो सकता है, जो युद्धपोतों को सेकंड में बर्बाद कर सकता है। इंडिया टुडे से बात करते हुए रक्षा विशेषज्ञ संदीप उन्नीथन ने कहा, "ईरानी संभवतः हूट रॉकेट टॉरपीडो की ओर इशारा कर रहे हैं, जिसका पहला गुप्त परीक्षण 2006 के आसपास किया गया था। यह इतनी तेजी से चलता है कि रक्षा प्रणालियों को प्रतिक्रिया देने का कोई समय नहीं मिलता।"
टॉरपीडो
हूट टॉरपीडो के बारे में क्या-क्या पता है?
इस हथियार के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है, लेकिन ईरान का दावा है कि ये पानी के भीतर चलने वाले दुनिया के सबसे तेज हथियारों में से एक है। ईरान का कहना है कि ये पानी के भीतर 360 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हमला कर सकता है, जबकि पारंपरिक टॉरपीडो की गति 60 से 100 किलोमीटर प्रति घंटे होती है। हालांकि, इन दावों पर कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है।
अलग
पारंपरिक टॉरपीडो से कितना अलग है हूट?
रूस के पास 1990 के दशक से ही सुपर-कैविटेटिंग टॉरपीडो है। पारंपरिक टॉरपीडो पानी को चीरकर आगे बढ़ते हैं, जिससे उनकी गति बहुत ज्यादा नहीं होती क्योंकि हवा की तुलना में पानी का घनत्व ज्यादा होता है। वहीं, सुपर-कैविटेटिंग टॉरपीडो अपने चारों ओर गैस का एक बुलबुला बना लेते हैं, जिससे पानी का प्रतिरोध काफी कम हो जाता है और टॉरपीडो बहुत तेज गति से चल पाता है। इसे सुपर-कैविटेशन तकनीक कहा जाता है।
कमियां
क्या हैं हूट टॉरपीडो की कमियां?
हूट की तेज गति ही इसके सबसे बड़ी खामी को जन्म देती है। दरअसल, तेज गति से चलने के कारण ये तेजी से बहुत ईंधन खर्च करते हैं और इस वजह से इनकी रेंज कम होती है। पारंपरिक टॉरपीडो की रेंज जहां 30 किलोमीटर होती है, वहीं, हूट की रेंज 15 किलोमीटर के आसपास है। हालांकि, अन्य टॉरपीडो की तुलना में ये 200 किलोग्राम से ज्यादा उच्च-विस्फोटक वारहेड ले जाने में सक्षम है।
युद्धपोत
क्या अमेरिकी युद्धपोतों को डुबा सकते हैं ईरान के टॉरपीडो?
अमेरिका के भारी भरकम यु्द्धपोत टॉरपीडो के कई हमलों को झेलने के लिए बनाए जाते हैं। इनकी सुरक्षा में कई विध्वंसक पोत, क्रूजर, पनडुब्बियों और लड़ाकू विमान रहते हैं, जो सैकड़ों किलोमीटर के इलाके पर नजर रखते हैं। ईरान को अपने हूट टॉरपीडो को लॉन्च करने के लिए इस सुरक्षा कवच को भेदना होगा। चूंकि हूट की रेंज केवल 15 किलोमीटर है, इसलिए जहाज को युद्धपोत के बहुत करीब आना होगा।