अमेरिका की सैन्य कार्रवाई का जवाब देगा ईरान, अब्बास अराघची बोले- पहले से बड़ी तैयारी
क्या है खबर?
अमेरिका ने ईरान में चल रहे सरकार विरोधी प्रदर्शन को देखते हुए सैन्य कार्रवाई की धमकी दी है, जिसके बाद ईरान सरकार का जवाब आया है। इस्लामिक गणराज्य के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिका को चेतावनी दी कि अगर वाशिंगटन ईरान को आजमाना चाहता है तो उनका देश भी युद्ध के लिए तैयार है। अल जजीरा के साथ विशेष बातचीत में अराघची ने यह भी कहा कि राजनीतिक अशांति के बीच अमेरिका के साथ बातचीत के रास्ते खुले हैं।
युद्ध
इस बार बड़ी तैयारी- अराघची
अराघची ने कहा, "अगर वाशिंगटन उस सैन्य विकल्प को आजमाना चाहता है, जिसे उसने पहले भी आजमाया है, तो हम तैयार हैं। हमारा देश सभी विकल्पों के लिए तैयार है। उम्मीद है कि अमेरिका बातचीत का समझदारी भरा विकल्प चुनेगा" उन्होंने दावा किया कि ईरान के पास पिछले साल के 12-दिवसीय युद्ध की तुलना में बड़ी और व्यापक सैन्य तैयारी है। उन्होंने इजरायल हितों की पूर्ति के लिए वाशिंगटन को युद्ध में घसीटने की कोशिश करने वालों को सावधान किया।
बातचीत
अमेरिका के साथ संवाद जारी
अराघची ने बताया कि अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ के साथ उनका संवाद विरोध-प्रदर्शनों से पहले और बाद में जारी रहा और अब भी जारी है। उन्होंने कहा कि वाशिंगटन के साथ विचारों पर हुई चर्चा का तेहरान में अध्ययन हो रहा है, उनके प्रस्तावित विचार और धमकियां एक-दूसरे के विपरीत हैं। उन्होंने कहा, "हम परमाणु वार्ता की मेज पर बैठने को तैयार हैं, बशर्ते यह धमकी या दबाव के बिना हो। क्या वाशिंगटन निष्पक्ष-न्यायपूर्ण बातचीत को तैयार है।"
मौत
प्रदर्शन में मौतों को लेकर क्या बोले ईरानी मंत्री?
तेहरान समेत अन्य शहरों में पिछले 2 हफ्तों में हुई मौतों को लेकर अराघची ने अपने पहले के किए दावों को दोहराया। उन्होंने कहा कि आतंकवादी तत्वों ने प्रदर्शनकारियों की भीड़ में घुसपैठ की और सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों को निशाना बनाया। बता दें कि ईरानी सरकार ने देश में अशांति फैलाने के लिए अमेरिका और इजरायल को दोषी ठहराया है। प्रदर्शन में अब तक 100 सुरक्षाकर्मी समेत 643 लोग मारे जा चुके हैं।
धमकी
अमेरिका ने सैन्य कार्रवाई पर कर रहा विचार?
अमेरिका में व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने मंगलवार को कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप हमेशा अपने सभी विकल्प खुले रखते हैं और हमला उन कई विकल्पों में से एक होगा जो कमांडर-इन-चीफ के लिए उपलब्ध हैं। लेविट ने कहा कि कूटनीति हमेशा राष्ट्रपति के लिए पहला विकल्प होता है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति को अगर जरूरी लगेगा तो वह सैन्य विकल्प का इस्तेमाल करने से नहीं डरेंगे, और यह बात ईरान से बेहतर कोई नहीं जानता।