ईरान ने की खामेनेई की मौत की पुष्टि, अयातुल्ला अराफी चुने गए अंतरिम सर्वोच्च नेता
क्या है खबर?
अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता आयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत हो गई है। ईरान के विदेश मंत्रालय ने रविवार दोपहर इसकी आधिकारिक पुष्टि करते हुए कहा कि रमजान के 10वें दिन अपराधी व्यक्तियों के हाथों शहीद के रूप में उनकी सम्मानजनक और गरिमापूर्ण मौत हुई है। इसके बाद वरिष्ठ धर्मगुरु अयातुल्ला अलीरेजा अराफी को ईरान का अंतरिम सर्वोच्च नेता चुना गया है। आइए उनके बारे में जानते हैं।
बयान
विदेश मंत्रालय ने क्या जारी किया बयान?
ईरान के विदेश मंत्रालय ने एक्स पर लिखा, "सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई ने एक धर्मपरायण जीवन व्यतीत किया, ईरान से प्रेम किया, ईरान की स्वतंत्रता सुनिश्चित की, विदेशी प्रभुत्व का विरोध किया और हमारे देश की दृढ़ता और मजबूती के लिए अथक परिश्रम किया। रमजान के 10वें दिन दुनिया के सबसे भ्रष्ट और अपराधी व्यक्तियों के हाथों शहीद के रूप में हुई उनकी सम्मानजनक मौत ने उन्हें ईरान और इस्लाम के इतिहास में एक प्रेरणादायक नायक बना दिया है।"
दावा
नेतन्याहू और ट्रंप ने किया था खामेनेई की मौत का दावा
इससे पहले इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हमलों में खामेनेई की मौत होने का दावा किया था। हालांकि, शुरुआत में ईरान ने उन दावों को खारिज कर दिया था। उसके बाद रविवार सुबह ईरानी इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) ने उनकी मौत की पुष्टि करते हुए दुख जताया था और 40 दिन के सार्वजनिक शोक की घोषणा की थी। इजरायल के हमलों में खामेनेई की बेटी, दामाद, पोती और बहू की मौत हुई है।
कदम
अराफी को मिली नेतृत्व परिषद में जगह
सरकारी समाचार एजेंसी ISNA के अनुसार, खामेनेई की मौत के बाद वरिष्ठ धर्मगुरु अराफी ईरान के अंतरिम सर्वोच्च नेता के रूप में कार्यभार संभालेंगे। ईरान की संवैधानिक प्रक्रिया के तहत उत्तराधिकारी चुने जाने तक संक्रमण काल के दौरान सर्वोच्च नेता के कर्तव्यों का निर्वहन करने के लिए जिम्मेदार अस्थायी नेतृत्व परिषद के न्यायविद सदस्य के रूप में अराफी को नियुक्त किया गया है। बता दें कि 67 वर्षीय अराफी गार्जियन काउंसिल के सदस्य भी हैं।
तंत्र
कैसा है ईरान का संवैधानिक तंत्र?
ईरान के संवैधानिक तंत्र के तहत, अंतरिम परिषद में राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन, मुख्य न्यायाधीश गुलाम-हुसैन मोहसेनी-एजेई और गार्जियन काउंसिल के एक धर्मगुरु शामिल होते हैं। खामेनेई की मृत्यु के बाद जब ईरान संक्रमण काल में प्रवेश करेगा, तो यह निकाय संयुक्त रूप से देश का नेतृत्व करेगा। इसमें अराफी की अहम भूमिका रहेगी। वह इस परिषद में रहते हुए खामेनेई के सभी कर्तव्यों का निर्वहन करेंगे। इसको लेकर ईरान में तैयारी शुरू हो गई है।
परिचय
कौन है अराफी?
अराफी का जन्म ईरान के यज्द प्रांत के मेयबोद में हुआ था। उनके पास भी अयातुल्ला की उपाधि है, जो दर्शाती है कि वे मुजतहिद (एक वरिष्ठ इस्लामी विद्वान) हैं। संरक्षक परिषद के सदस्य होने के साथ-साथ वे विशेषज्ञों की सभा के भी सदस्य हैं। उन्होंने विशेषज्ञों की सभा के दूसरे उपाध्यक्ष के रूप में भी कार्य किया है। इससे पहले वे अल-मुस्तफा अंतर्राष्ट्रीय विश्वविद्यालय के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। वह अरबी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में धाराप्रवाह हैं।