क्या है इंडोनेशिया के प्रंबानन मंदिर की खासियत, जिसका प्रधानमंत्री मोदी ने किया दौरा?
क्या है खबर?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी इंडोनेशिया यात्रा के दौरान आज 1,000 साल पुराने प्रंबानन हिंदू मंदिर पहुंचे। उनक साथ इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो भी थे। प्रधानमंत्री मोदी ने घोषणा की कि भारत इस प्रतिष्ठित मंदिर के जीर्णोद्धार में मदद करेगा। उन्होंने मंदिर के संरक्षण और जीर्णोद्धार परियोजना का उद्घाटन भी किया। इस मंदिर को यूनेस्को विश्व धरोहर की सूची में भी जगह मिली है। आइए इस ऐतिहासिक मंदिर के बारे में जानते हैं।
मंदिर
कहा हैं प्रंबानन मंदिर?
प्रंबानन मंदिर इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता से करीब 500 किलोमीटर दूर योग्यकार्ता के पास स्थित है। जावा द्वीप पर स्थित ये मंदिर दुनिया के सबसे बड़े मंदिर परिसरों में से एक है। इस परिसर में शिव, विष्णु और ब्रह्मा को समर्पित 240 अलग-अलग मंदिर हैं। इनमें 47 मीटर ऊंचा शिव मंदिर सबसे बड़ा है। मंदिर की दीवारों और रेलिंग पर रामायण और अन्य हिंदू ग्रंथों की कहानियां उकेरी हुई हैं।
संरचना
कैसी है मंदिर की संरचना?
मंदिर परिसर में 3 केंद्र हैं। सबसे भीतरी हिस्से में 16 मंदिर हैं। इनमें से सबसे अहम 47 मीटर ऊंचा शिव मंदिर है। इसके उत्तर में ब्रह्मा और दक्षिण में विष्णु मंदिर हैं। शिव मंदिर के अंदर दिलचस्प नक्काशी की गई है। इसका आंतरिक भाग 4 कमरों में विभाजित है। एक मुख्य कमरे में शिव की प्रतिमा है, जबकि अन्य 3 कमरों में दुर्गा, अगस्त्य और गणेश की प्रतिमाएं हैं।
इतिहास
क्या है मंदिर का इतिहास?
इस मंदिर का निर्माण लगभग 850 ईस्वी में हिंदू और बौद्ध राजवंशों के कार्यकाल में हुआ था। माना जाता है कि इसका निर्माण संजय राजवंश के राकाई पिकातन ने शुरू करवाया था। आगे चलकर राकाई बलितुंग के शासनकाल में भी निर्माण जारी रहा। प्रंबानन मंदिर को 10वीं शताब्दी में छोड़ दिया गया था। इसके बाद आए शक्तिशाली भूकंपों ने मंदिर की कई संरचनाओं को खंडहर में बदल दिया है। 1991 में यूनेस्को ने इसे विश्व धरोहर स्थल घोषित किया था।
भारत
मंदिर को लेकर भारत-इंडोनेशिया में क्या समझौता हुआ?
प्रधानमंत्री मोदी ने घोषणा की कि भारत प्रंबानन मंदिर के संरक्षण के लिए जकार्ता को सहायता प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि यह मंदिर इंडोनेशिया और भारत की साझा सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। एक संयुक्त बयान में दोनों देशों ने कहा, "दोनों नेताओं ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा योग्याकार्ता में यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल प्रंबानन मंदिर परिसर के जीर्णोद्धार और संरक्षण की दिशा में भारत समर्थित परियोजना के उद्घाटन का स्वागत किया।"
समझौते
भारत क्यों कर रहे हैं मंदिर का जीर्णोद्धार?
भारत द्वारा मंदिर के जीर्णोद्धार में मदद करने का फैसला देश की साझा विरासत को पुनर्जीवित करने की रणनीति का हिस्सा है। 2014 में भारत ने वियतनाम के साथ यूनेस्को की विश्व धरोहर माई सोन के जीर्णोद्धार को लेकर भी समझौता किया था। 2017 में भारत ने बागान पुरातात्विक क्षेत्र में भूकंप से क्षतिग्रस्त स्मारकों के जीर्णोद्धार के लिए म्यांमार के साथ समझौता किया था। भारत ने कंबोडिया के अंगकोर वाट परिसर के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।