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#NewsBytesExplainer: ईरान के पास कितना कच्चा तेल, खार्ग द्वीप पर क्यों कब्जा करना चाहते हैं ट्रंप? 
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खार्ग द्वीप पर कब्जा करने की बात कही है

#NewsBytesExplainer: ईरान के पास कितना कच्चा तेल, खार्ग द्वीप पर क्यों कब्जा करना चाहते हैं ट्रंप? 

लेखन आबिद खान
Mar 30, 2026
12:49 pm

क्या है खबर?

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर जमीनी सैन्य अभियान शुरू करने के संकेत देते हुए कहा है कि ईरान में तेल पर कब्जा करना उनकी 'सबसे पसंदीदा चीज' है। उन्होंने ईरान के खार्ग द्वीप पर भी कब्जे के संकेत दिए हैं, जहां से ईरान अपना लगभग 90 प्रतिशत कच्चा तेल निर्यात करता है। ट्रंप के इस बयान ने अनिश्चितताओं को और बढ़ा दिया है। आइए आज ईरान के तेल भंडार के बारे में जानते हैं।

भंडार

ईरान के पास कितना तेल भंडार है?

ईरान के पास दुनिया का सबसे विशाल पेट्रोलियम भंडारों में से एक है। माना जाता है कि ईरान के पास 208.6 अरब बैरल तेल भंडार हैं। यह सऊदी अरब और वेनेजुएला के बाद दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा और कुल ज्ञात तेल भंडार का लगभग 12 प्रतिशत है। अनुमानों के मुताबिक, अगर ईरान कच्चा तेल निर्यात करना बंद कर दे, तो उसका तेल भंडार 290 साल तक चल सकता है।

उत्पादन

रोजाना कितना तेल उत्पादन और निर्यात करता है ईरान?

फिलहाल ईरान प्रतिदिन 30 से 45 लाख बैरल कच्चे तेल का उत्पादन करता है। अमेरिका के प्रतिबंधों के बावजूद ईरान अपने तेल को अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारी मात्रा में निर्यात करता है। 2025-2026 में ईरान रोजाना लगभग 15 लाख बैरल कच्चा तेल निर्यात कर रहा है। ईरान के कुल तेल निर्यात का 80-90 प्रतिशत हिस्सा केवल चीन खरीदता है। प्रतिबंध लगने से पहले भारत भी ईरान के तेल का खरीदार था।

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खार्ग

ईरान की तेल अर्थव्यवस्था के लिए कितना अहम है खार्ग द्वीप?

खार्ग द्वीप ईरान की तेल की जीवनरेखा है। ईरान के कच्चे तेल के निर्यात का लगभग 90-94 प्रतिशत हिस्सा यहीं से होकर गुजरता है। इस द्वीप में प्रतिदिन 70 लाख बैरल तेल लोड करने की विशाल क्षमता है। खार्ग में 40 से अधिक कच्चे तेल के भंडारण टैंक हैं जिनकी कुल क्षमता 2 करोड़ बैरल से अधिक है। द्वीप के चारों ओर का गहरा जल क्षेत्र इसे विशालकाय जहाजों को सुरक्षित रूप से डॉक करने में सक्षम बनाता है।

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योजना

खार्ग द्वीप पर कब्जे को लेकर क्या है अमेरिका की योजना?

रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका ने खार्ग द्वीप जैसे रणनीतिक स्थलों पर 'सीमित जमीनी हमले' के लिए योजना तैयार की है। रिपोर्ट में बताया गया है कि अमेरिका ऐसी योजनाएं बना रहा हैं, जो पूर्ण पैमाने का आक्रमण नहीं है, लेकिन इसमें विशेष अभियान बलों और पारंपरिक पैदल सेना इकाइयों द्वारा ईरानी सैन्य बुनियादी ढांचे पर हमले करना शामिल है। हालांकि, ट्रंप ने कहा है कि वे खार्ग पर कब्जा कर भी सकते हैं और नहीं भी।

भारत

ईरान से भारत कितना तेल खरीदता है?

ऐतिहासिक रूप से साल 2018 में अमेरिका द्वारा प्रतिबंध लगाए जाने से पहले भारत ईरानी कच्चे तेल का एक प्रमुख खरीदार था। उस समय ईरानी कच्चे तेल का भारत की कुल खपत में लगभग 11.5 प्रतिशत हिस्सा था। हालांकि, प्रतिबंधों के बाद भारत ने ईरान से धीरे-धीरे तेल खरीद कम कर दी और रूस और अन्य खाड़ी देशों की ओर रुख किया। बता दें कि भारत अपनी कुल तेल जरूरत का 90 प्रतिशत हिस्सा आयात करता है।

नुकसान

खार्ग द्वीप हाथ से निकलना ईरान के लिए कितना बड़ा झटका?

द्वीप पर ईरानी तेल मंत्रालय द्वारा संचालित 3 प्रमुख ऊर्जा संयंत्र भी हैं। यहां खार्ग पेट्रोकेमिकल कंपनी भी है, साथ ही तेल और LPG के भंडारण और निर्यात के लिए इस्तेमाल की जाने वाली एक बड़ी इकाई भी है। यहां पर इस्लामिक आजाद विश्वविद्यालय की समुद्री विज्ञान शाखा भी है, जहां छात्रों को पेट्रोलियम और समुद्री अध्ययन जैसे विषय पढ़ाए जाते हैं। यानी ये ईरान की आय के लिए सबसे अहम है। यहां कोई नुकसान सीधे-सीधे अर्थव्यवस्था पर चोट है।

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