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कौन थे डॉ गोपाल जी त्रिवेदी, जिन्हें खेती में महत्वपूर्ण योगदान के लिए मरणोपरांत मिलेगा 'पद्मश्री'?
डॉ. गोपाल जी त्रिवेदी को मिलेगा पद्म श्री सम्मान

कौन थे डॉ गोपाल जी त्रिवेदी, जिन्हें खेती में महत्वपूर्ण योगदान के लिए मरणोपरांत मिलेगा 'पद्मश्री'?

May 22, 2026
10:55 am

क्या है खबर?

बिहार के जाने-माने कृषि वैज्ञानिक और राजेंद्र कृषि विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ गोपाल जी त्रिवेदी को मरणोपरांत 'पद्मश्री' सम्मान दिया जाएगा। डॉ त्रिवेदी ने मक्का उत्पादन, लीची खेती और मछली आधारित खेती को बढ़ावा देकर बिहार के किसानों को नई दिशा देने का काम किया था। राष्ट्रपति भवन में 25 मई को होने वाले पद्म पुरस्कार समारोह में यह सम्मान उन्हें खेती, कृषि शिक्षा और किसानों के जीवन को बेहतर बनाने में उनके योगदान के लिए दिया जाएगा।

परिचय

गांव से निकलकर बने बड़े कृषि वैज्ञानिक

डॉ त्रिवेदी का जन्म 15 फरवरी, 1930 को हुआ था। उन्होंने बिहार के सबौर कृषि कॉलेज से 1954 में कृषि में स्नातक और 1958 में उसी संस्थान से कृषि विस्तार शिक्षा में मास्टर डिग्री हासिल की। इसके बाद वह नई दिल्ली गए, जहां उन्होंने भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान पूसा से 1963 में PhD पूरी की। गांव और किसानों से जुड़े रहने की वजह से लोग उन्हें 'गांव पुरुष' और 'किसान मित्र' के नाम से भी जानते थे।

काम

किसानों के साथ मिलकर किया बड़ा काम

डॉ त्रिवेदी ने अपने जीवन का बड़ा हिस्सा गांवों में किसानों के बीच बिताया था। उन्होंने खेती की नई तकनीकों को जमीन पर लागू करने में किसानों की मदद की। उनकी कोशिशों से कई किसानों ने खाली पड़ी जमीन को मछली आधारित खेती में बदल दिया। उनके बिहार एक्वाकल्चर बेस्ड एग्रीकल्चर (BABA) मॉडल से गांवों में पानी का स्तर बेहतर हुआ और पिछड़े इलाकों के लोगों को काम मिलने लगा। उनके इस प्रयास को बिहार में काफी सराहना मिली।

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बदलाव

लीची और मक्का खेती में लाए बदलाव

मुजफ्फरपुर में डॉ त्रिवेदी ने लीची किसानों और कृषि उद्योगों के बीच साझेदारी की शुरुआत करवाई। इससे किसानों को बेहतर गुणवत्ता की लीची उगाने और प्रोसेसिंग प्लांट लगाने में मदद मिली। उन्होंने लीची बागानों में नई तकनीकों का इस्तेमाल शुरू किया, जिसे बाद में दूसरे किसानों ने भी अपनाया। इसके अलावा, उन्होंने बिहार में सर्दियों के मौसम में मक्का की खेती को बढ़ावा दिया। आधुनिक तकनीकों के कारण किसानों की पैदावार और आमदनी दोनों में बढ़ोतरी हुई।

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पुरस्कार

मिले हैं कई पुरस्कार मिले

कृषि और किसानों के लिए किए गए कामों के कारण डॉ त्रिवेदी को कई बड़े सम्मान मिले। उन्हें वर्ष 2011 में तत्कालीन राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने 'लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड' दिया था। इसके बाद 2015 में उन्हें 'कृषि ऋषि' सम्मान भी मिला। ग्रामीण परिवारों के सामाजिक और आर्थिक स्तर को मापने के लिए बनाया गया उनका 'त्रिवेदी स्केल' भी काफी प्रसिद्ध हुआ। 12 मई, 2026 को उनका निधन हो गया, लेकिन कृषि क्षेत्र में उनका योगदान हमेशा याद रखा जाएगा।

पीपुल्स पद्म

'पीपुल्स पद्म' के जरिए आम लोगों के काम को मिल रही पहचान

सरकार अब पद्म पुरस्कारों में सिर्फ चर्चित चेहरों तक सीमित नहीं रह रही है। 'पीपुल्स पद्म' पहल के तहत ऐसे लोगों को आगे लाया जा रहा है, जिन्होंने बिना किसी पहचान या बड़े मंच के समाज के लिए लंबे समय तक काम किया। इनमें गांवों, आदिवासी इलाकों और पिछड़े क्षेत्रों में रहने वाले कई लोग शामिल हैं। शिक्षा, खेती, स्वास्थ्य और समाज सेवा जैसे क्षेत्रों में चुपचाप काम करने वाले लोगों को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान दिया जा रहा है।

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