साहित्य और शिक्षा क्षेत्र में योगदान के लिए अंके गौड़ा को मिलेगा 'पद्मश्री', जानिए उनकी कहानी
क्या है खबर?
25 मई को राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा कर्नाटक के रहने वाले अंके गौड़ा को 'पद्मश्री' पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। पुस्तकालय प्रेमी और पूर्व बस कंडक्टर गौड़ा को यह पुरस्कार साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में उनके असाधारण योगदान और समाज के निचले स्तर तक ज्ञान और शिक्षा मुफ्त में पहुंचाने के लिए दिया जाएगा। आइए जानते हैं कि गौड़ा ने कैसे साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र अपनी खास पहचान बनाई।
परिचय
कौन हैं अंके गौड़ा?
कर्नाटक के एक गरीब किसान परिवार में पैदा होने वाले गौड़ा ने कन्नड़ साहित्य में MA की पढ़ाई की है। इसके बाद उन्होंने 30 साल तक एक चीनी कारखाने और बस कंडक्टर के तौर पर काम किया। शुरू से ही उन्हें किताबों से इतना लगाव था कि वे कम सैलरी में भी बचत करके किताबें इकट्ठा करते थे। किताबों के प्रति गौड़ा का जुनून इस कदर था कि उन्होंने किताबें खरीदने के लिए मैसूर में अपनी संपत्ति तक बेच दी।
पुस्तकालय
पुस्तकालय में है 20 लाख से अधिक किताबें
75 वर्षीय गौड़ा ने अपने पूरे जीवन की कमाई से एक पुस्तकालय बनाया, जिसमें 20 लाख से अधिक पुस्तकों का संग्रह है। गौड़ा का पुस्तकालय सभी वर्ग के लोगों के लिए मुफ्त है। यह पुस्तकालय कर्नाटक के मांड्या जिले की एक छोटे सी नगरपालिका पांडवपुरा में स्थित है। गौड़ा, उनकी पत्नी और बेटा पुस्तकालय में ही रहते हैं, जो सप्ताह के हर दिन खुला रहता है। पुस्तकालय बनाने में कर्नाटक के तत्कालीन मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी ने भी सहायता की थी।
किताबें
पुस्तकालय में किताबों, डिक्शनरी और पुरानी पांडुलिपियों का विशाल संग्रह
गौड़ा के पुस्तकालय में 22 भाषाओं में 20 लाख से अधिक किताबों के साथ-साथ 5,000 से अधिक डिक्शनरी और पुरानी पांडुलिपियां भी हैं। गौड़ा ने बताया कि उनके पुस्तकालय में पुराण, उपनिषदों और कुरान के अलावा 200 से 300 साल पुरानी इतिहास की किताबों समेत रामायण और महाभारत के 3,000 संस्करण हैं। इसके अतिरिक्त नोबेल पुरस्कार जैसे पुरस्कारों से सम्मानित लोगों द्वारा लिखी गई किताबें भी उनके पुस्तकालय में मौजूद हैं।
पुरस्कार
'पीपुल्स पद्म' संकल्पना पर सरकार का जोर
'पीपुल्स पद्म' संकल्पना के जरिए सरकार पद्म पुरस्कारों के लिए चर्चित लोगों की बजाय दूरदराज इलाकों के गुमनाम नायकों को प्राथमिकता दे रही है, जिनके संघर्ष ने समाज कल्याण में अहम भूमिका अदा की है। इन गुमनाम नायकों में पिछड़े वर्ग, आदिम जनजातियों और दूरदराज के इलाकों में रहने वाले लोग शामिल हैं, जिन्होंने अपना पूरा जीवन बिना किसी स्वार्थ के दूसरों की सहायता में लगा दिया और अब तक उनका यह प्रयास जारी है।