ईरान के खिलाफ युद्ध छेड़ने से अमेरिका को आर्थिक रूप से कितना नुकसान हो सकता है?
क्या है खबर?
अमेरिका गत 28 फरवरी को इजरायल के साथ मिलकर ईरान के खिलाफ 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' शुरू करने के बाद अपने सबसे महत्वपूर्ण सैन्य टकरावों में से एक में प्रवेश कर चुका है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा युद्ध के 4-5 सप्ताह से अधिक समय तक जारी रहने के संकेत देने से यह साफ हो गया है कि इसका अमेरिका पर बड़ा वित्तीय प्रभाव पड़ेगा। ऐसे में आइए जानते हैं इस युद्ध के कारण अमेरिका को कितना आर्थिक नुकसान हो सकता है।
व्यापकता
'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' कितना व्यापक है?
'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' हाल के वर्षों में पश्चिम एशिया में चलाए गए बड़े समन्वित अमेरिकी सैन्य अभियानों में से एक है। अमेरिकी सेना की सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, ऑपरेशन शुरू होने के बाद से ईरान के भीतर 1,000 से अधिक ठिकानों पर हमले किए जा चुके हैं। ईरान के 11 जहाजों को नष्ट कर दिया गया है। पेंटागन ने वायु, थल, समुद्री और मिसाइल रक्षा बलों सहित 20 से अधिक विभिन्न हथियार प्रणालियों के उपयोग की पुष्टि की है।
इस्तेमाल
अमेरिका ने युद्ध में क्या-क्या इस्तेमाल किया?
अमेरिका ने इस युद्ध में B-1 बमवर्षक, महत्वपूर्ण परमाणु और सैन्य प्रतिष्ठानों के खिलाफ B-2 स्टील्थ बमवर्षकों, F-35 लाइटनिंग II और F-22 रैप्टर स्टील्थ लड़ाकू विमानों, F-15 लड़ाकू विमान, F-16 फाइटिंग फाल्कन, F/A-18 सुपर हॉर्नेट और A-10 हमलावर विमानों सहित विभिन्न प्रकार के विमानों का इस्तेमाल किया है। इसी तरह EA-18G ग्रोवलर्स द्वारा इलेक्ट्रॉनिक युद्ध का संचालन किया गया है, जिन्हें शत्रु की वायु रक्षा प्रणालियों को निष्क्रिय करने का कार्य सौंपा गया है।
अन्य
इन प्रणालियों का भी किया गया है इस्तेमाल
अमेरिका ने युद्ध में 'लूकास ड्रोन' जैसी मानवरहित प्रणालियाें का भी इस्तेमाल किया है। इसी तरह MQ-9 रीपर ड्रोन टोही, जमीन पर M-142 हाई मोबिलिटी आर्टिलरी रॉकेट सिस्टम (HIMARS) का उपयोग किया गया है, जबकि नौसेना के संसाधनों से टोमाहॉक क्रूज मिसाइलें दागी गई हैं। समुद्री निगरानी P-8 पोसाइडन विमानों द्वारा की जा रही है। रसद और आपूर्ति संचालन के लिए C-17 ग्लोबमास्टर और C-130 हरक्यूलिस विमानों और हवाई ईंधन भरने वाले टैंकर विमानों का भी इस्तेमाल किया गया है।
लागत
तत्काल परिचालन लागत क्या हैं?
पेंटागन की पूर्व वरिष्ठ बजट अधिकारी एलेन मैककुस्कर ने वॉल स्ट्रीट जर्नल को बताया कि युद्ध के प्रारंभिक चरण पर लगभग 63 करोड़ डॉलर (लगभग 5,600 करोड़ रुपये) की लागत आई है। पहले 24 घंटों के दौरान किए गए अमेरिकी हमलों पर लगभग 77 करोड़ डॉलर (लगभग 6,900 करोड़ रुपये) खर्च हुए हैं। उस एक दिन का खर्च 2026 के अमेरिकी रक्षा बजट का लगभग 0.1 प्रतिशत है। यह अपने आप में बहुत बड़ा खर्च है।
खर्च
नौसैनिक तैनाती पर कितना खर्च?
रिपोर्ट के अनुसार, गोला-बारूद और विमान संचालन के अलावा, नौसैनिक तैनाती से प्रतिदिन वित्तीय बोझ बढ़ता है। सेंटर फॉर न्यू अमेरिकन सिक्योरिटी का अनुमान है कि एक विमानवाहक पोत स्ट्राइक समूह के संचालन पर प्रतिदिन लगभग 65 लाख डॉलर (लगभग 58 करोड़ रुपये) का खर्च आता है। फारस की खाड़ी क्षेत्र में 2 नौसैनिक जहाजों की तैनाती से परिचालन लागत लगभग 1.30 करोड़ डॉलर (लगभगर 117 करोड़ रुपये) तक पहुंच जाती है।
खतरा
अमेरिकी खर्च के कितना बढ़ने का है अनुमान?
पेन व्हार्टन बजट मॉडल (PWBM) के निदेशक केंट स्मेटर्स ने अनुमान लगाया कि इस युद्ध से अमेरिकी करदाताओं पर प्रत्यक्ष बजटीय लागत 45 से 95 अरब डॉलर (अधिकतम 8.55 लाख करोड़ रुपये) तक हो सकती है। उनका अनुमान है कि इस युद्ध पर लगभग 65 अरब डॉलर (अधिकतम 5.85 लाख करोड़ रुपये) खर्च होंगे, जिसमें सैन्य अभियान और उपकरण एवं आपूर्ति की भरपाई शामिल है। अगर युद्ध 2 महीने से अधिक चलता है, तो यह राशि और बढ़ जाएगी।
आर्थिक
अमेरिका को कितना अतिरिक्त आर्थिक नुकसान हो सकता है?
प्रत्यक्ष सैन्य खर्च के अलावा, स्मेटर्स ने अमेरिका को लगभग 115 अरब डॉलर (लगभग 10.35 लाख करोड़ रुपये) के अतिरिक्त आर्थिक नुकसान का अनुमान लगाया। हालांकि, उन्होंने संकेत दिया कि अनिश्चितता का दायरा व्यापक है, जो 50 से 210 अरब डॉलर (अधिकतम लगभग 18.90 लाख करोड़ रुपये) तक हो सकता है। ऑपरेशन एपिक फ्यूरी की संभावित लागतों पर मौजूदा वित्तीय दबावों के संदर्भ में भी विचार किया जाना चाहिए। यह अमेरिका पर कर्ज भी बढ़ा सकता है।
नुकसान
इस युद्ध से अमेरिका को कुल कितना नुकसान संभव?
ब्राउन यूनिवर्सिटी की 2025 कॉस्ट्स ऑफ वॉर रिपोर्ट के अनुसार, 7 अक्टूबर, 2023 से अमेरिका ने इजराइल को लगभग 21.7 अरब डॉलर (1.95 लाख करोड़ रुपये) की सैन्य सहायता प्रदान की है। यमन, ईरान और इजरायल के समर्थन में अमेरिकी अभियानों पर 12.07 अरब डॉलर (1.08 लाख करोड़ रुपये) तक की लागत आई है। इस हिसाब से इस युद्ध के 2 महीने से अधिक चलने पर कुल नुकसान 210 अरब डॉलर (लगभग 18.90 लाख करोड़ रुपये) हो सकता है।