2026 में बांग्लादेश समेत इन देशों में होंगे चुनाव, जिन पर रहेगी भारत की भी नजर
क्या है खबर?
कूटनीतिक लिहाज से भारत के लिए साल 2026 बेहद अहम होने जा रहा है। भारत के नजदीकी दक्षिण एशिया से लेकर अमेरिका में मध्यावधि चुनाव होंगे, जिनका असर भारत पर भी पड़ना तय है। बांग्लादेश से लेकर ब्राजील तक इस साल जनता सरकार चुनने के लिए मतदान करेगी। इन चुनावों के नतीजे वैश्विक राजनीति के साथ भारत की विदेश नीति और कूटनीति की दिशा भी तय करेंगे। आइए जानते हैं 2026 में किन देशों में चुनाव होंगे।
अमेरिका
अमेरिका में मध्यावधि चुनाव
3 नवंबर, 2026 को अमेरिका में मध्यावधि चुनाव होंगे। इस दौरान प्रतिनिधि सभा की सभी 435 और अमेरिकी सीनेट की 33 सीटों के लिए मतदान होगा। फिलहाल रिपब्लिकन पार्टी के पास प्रतिनिधि सभा में मामूली बहुमत है। ट्रेंड ये रहा है कि सत्ताधारी पार्टी हमेशा मध्यावधि चुनावों में प्रतिनिधि सभा की सीटें हार जाती हैं। अगर इस साल भी ये ट्रेंड जारी रहा, तो रिपब्लिकन पार्टी बहुमत खो सकती है।
भारत की नजर
मध्यावधि चुनाव पर क्यों होंगी भारत की नजरें?
अगर प्रतिनिधि सभा में रिपब्लिकन पार्टी बहुमत खो देती है, तो ट्रंप प्रशासन की आक्रामक व्यापार और आव्रजन नीतियों के लिए संवेदनशील स्थिति पैदा हो सकती है। माना जा रहा है कि इससे भारत को एक स्थिर विधायी सहयोगी मिल सकता है। इसके साथ ही उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की खाली सीट ओहायो और मार्को रुबियो की सीट फ्लोरिडा में भी विशेष चुनाव होंगे। यहां के विजेता संभवत: सीनेट की विदेश संबंधी समिति में दखल करने में सक्षम होंगे।
ब्राजील
साल के अंत में ब्राजील में भी आम चुनाव
ब्राजील में 4 अक्टूबर को आम चुनाव होंगे। मुख्य मुकाबला राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा के नेतृत्व वाली वर्कर्स पार्टी और दक्षिणपंथी पार्टियों में होगा, जिनका नेतृत्व जेल में बंद पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो कर रहे हैं। इन चुनावों में अमेरिका की भी खास दिलचस्पी होगी, क्योंकि बोलसोनारो पर तख्तापलट की साजिश का मुकदमा चल रहा है और वो नजरबंद है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस कार्रवाई से नाराज हैं और ब्राजील को धमकी दे चुके हैं।
भारत
ब्राजील के चुनावों में क्यों होगी भारत की दिलचस्पी?
भारत के लिए बहुपक्षीय मंचों खासतौर पर BRICS और भारत-ब्राजील-दक्षिण अफ्रीका (IBSA) में ब्राजील एक अहम भागीदार है। इस साल BRICS की अध्यक्षता भी भारत के पास आई है। भारत चाहेगा कि लूला के गठबंधन की जीत हो। वजह ये है कि इनका एजेंडा भारत के विकासशील देशों के हितों की वकालत करने और BRICS को एक गैर-पश्चिमी शक्ति के रूप में मजबूत करने के एजेंडे से बेहतर तरीके से मेल खाता है।
इजरायल
इजरायल में भी हो सकते हैं चुनाव
इजरायल में साल के अंत में चुनाव प्रस्तावित हैं। इन्हें प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के लंबे कार्यकाल और उनकी सुरक्षा नीति पर जनमत संग्रह जैसा माना जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत-इजराइल संबंध रणनीतिक साझेदारी के स्तर पर ले जाए गए हैं। इजरायल भारत को ड्रोन, मिसाइल समेत उच्च-प्रौद्योगिकी रक्षा उपकरणों की आपूर्ति करता है। I2U2 (भारत, इजरायल, UAE, अमेरिका) और भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे (IMEC) के लिहाज से भी ये चुनाव भारत के लिए अहम है।
बांग्लादेश
बांग्लादेश चुनाव के नतीजे बेहद अहम
बांग्लादेश में 12 फरवरी को मतदान होगा। पिछले साल शेख हसीना के तख्तापलट के बाद बांग्लादेश में अंतरिम सरकार का शासन है। चुनाव से पहले उनकी पार्टी पर प्रतिबंध लगा दिया गया है और जमात-ए-इस्लामी जैसे कट्टरपंथी संगठन को ज्यादा स्वतंत्रता मिली है। हसीना ने अपने कार्यकाल में भारत विरोधी समूहों पर नकेल कसी और सीमा विवादों को सुलझाया। वहीं, वर्तमान शासन चीन के पक्ष में झुका हुआ है, जिसने भारत के लिए नई परेशानियां पैदा की हैं।
नेपाल
नेपाल में जेन जी आंदोलन के बाद नेतृत्व की लड़ाई
नेपाल में 5 मार्च को संसदीय चुनाव होने हैं। बीते साल हुए जेन जी आंदोलन के बाद केपी शर्मा ओली को प्रधानमंत्री पद छोड़ना पड़ा था। फिलहाल वहां सुशीला कार्की के नेतृत्व में अतंरिम सरकार है। नेपाल हमेशा से भारत के लिए संवेदनशील मुद्दा रहा है। वहां चीन का हस्तक्षेप बढ़ रहा है। कालापानी, लिम्पियाधुरा और लिपुलेख दर्रे को लेकर विवाद भी तूल पकड़ रहा है। नेपाल में मजबूत और स्थिर सरकार दोनों देशों के संबंधों के लिए अहम है।