नेतन्याहू के गठबंधन पर संकट, दिमोना में आइजेनकोट ने दिया बड़ा झटका
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और उनकी लिकुड पार्टी का गढ़ माना जाने वाला दिमोना शहर आजकल अचानक चर्चा में आ गया है। 7 अक्टूबर, 2023 को हमास के हमले के बाद लिकुड पार्टी के कई पुराने समर्थक अब अपने वोट को लेकर दुविधा में हैं। इनमें से कुछ लोग अब गादी आइजेनकोट का समर्थन कर रहे हैं। आइजेनकोट एक पूर्व सैन्य प्रमुख हैं जिनकी मिजराही जड़ें हैं और उन्हें एक नए और मजबूत विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है। चुनाव से बस कुछ ही दिन पहले यह राजनीतिक उथल-पुथल नेतन्याहू के गठबंधन के लिए मुश्किल खड़ी कर सकती है।
लिकुड को मिलेगा सिर्फ 55 प्रतिशत वोट
2022 में जिन लोगों ने लिकुड पार्टी को वोट दिया था, उनमें से अब सिर्फ 55 प्रतिशत ही मंगलवार को फिर से पार्टी को वोट देने की बात कह रहे हैं। करीब 15 प्रतिशत मतदाता आइजेनकोट के 'याशर' जैसे विपक्षी दलों की ओर मुड़ गए हैं। आइजेनकोट के फौजी अनुभव और गाजा में उनके निजी नुकसान ने स्थानीय लोगों को बहुत प्रभावित किया है। वहीं, अभी भी 13 प्रतिशत मतदाता यह तय नहीं कर पाए हैं कि वे किसे वोट देंगे। चुनाव में अब बहुत कम समय बचा है, ऐसे में नेतन्याहू दिमोना के लोगों को अपने कामों की याद दिला रहे हैं, लेकिन यह कहना मुश्किल है कि क्या वे एक बार फिर उनका भरोसा जीत पाएंगे या नहीं।