#NewsBytesExplainer: क्या होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों से शुल्क वसूल सकता है अमेरिका, क्या कहता है कानून?
क्या है खबर?
अमेरिका और ईरान एक बार फिर लगभग पूर्ण युद्ध की ओर बढ़ रहे हैं। दोनों देशों में दोबारा पनपे इस तनाव के केंद्र में होर्मुज जलडमरूमध्य है। ईरान ने होर्मुज में जहाजों पर हमला किया, जिसके बाद तनाव बढ़ता गया। अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों को अमेरिका को 20 प्रतिशत शुल्क देना होगा। आइए समझते हैं क्या कानूनन अमेरिका ऐसा कर सकता है।
बयान
सबसे पहले ट्रंप की घोषणा जानिए
ट्रंप ने कहा, "अब से अमेरिका को 'होर्मुज जलडमरूमध्य का संरक्षक' माना जाएगा। साथ ही निष्पक्षता के नाते, दुनिया के इस बेहद संवेदनशील हिस्से में सुरक्षा और हिफाजत का काम करने के लिए जरूरी सभी खर्चों की भरपाई के तौर पर, यहां से भेजे जाने वाले सभी कार्गो पर 20 प्रतिशत की दर से शुल्क लिया जाएगा। यह प्रक्रिया और व्यवस्था तुरंत शुरू हो जाएगी। इस मामले पर ध्यान देने के लिए धन्यवाद!"
कानून
अब जानिए कानूनी रूप से होर्मुज पर किसका अधिकार है?
समुद्री कानून पर संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन (UNCLOS) के मुताबिक, किसी देश की तटरेखा से करीब 22 किलोमीटर तक के क्षेत्रीय समुद्री जल पर उस देश का नियंत्रण होता है। हालांकि, यहां से विदेशी जहाजों को 'बिना नुकसान पहुंचाए गुजरने' का अधिकार होता है।
होर्मुज अपने सबसे संकरे हिस्से में 33 किलोमीटर चौड़ा है। इसके उत्तर में ईरान और दक्षिण में ओमान और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) है।
यानी कानूनी रूप से ये ईरान और ओमान के नियंत्रण में आता है।
शुल्क
कितना शुल्क लेगा अमेरिका?
CNN से बात करते हुए हुए सेंटर फॉर मैरीटाइम स्ट्रेटेजी के वरिष्ठ फेलो जॉन मैककोवन ने कहा, "ट्रंप के बयान से यह स्पष्ट नहीं है कि शुल्क की गणना कैसे की जाएगी। क्या यह नाकाबंदी पर हमारी लागत का 20 प्रतिशत है, जिसे किसी तरह जहाजों की संख्या से विभाजित किया गया है? या ये अमेरिकी नौसेना द्वारा सुरक्षा में होने वाली लागत का 20 प्रतिशत, या परिवहन किए जा रहे माल के मूल्य का 20 प्रतिशत है।"
कानून
क्या ये शुल्क कानूनी होगा?
अमेरिकी नौसेना युद्ध महाविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून के प्रोफेसर जेम्स क्रास्का ने कहा, "मेरे अनुसार अमेरिका कहना चाह रहा है कि हम यहां से गुजरने वाले जहाजों को सुरक्षा देंगे और अगर आप सुरक्षा चाहते हैं, तो यह इसकी कीमत है। यह अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप होगा, क्योंकि इसे स्वेच्छा से लागू किया जा रहा है। माल भेजने वाले तय कर सकते हैं कि वे सुरक्षा के लिए भुगतान करना चाहते हैं या नहीं।"
चुनौतियां
व्यवस्था को लागू करने में क्या हैं चुनौतियां?
जानकारों का मानना है कि इस व्यवस्था को लागू करना आसान नहीं होगा। सबसे बड़ी चुनौती ईरान की ही होगी।
इससे आवागमन की लागत भी बढ़ जाएगी। आमतौर पर शिपिंग कंपनियां माल के मूल्य का 2-3 प्रतिशत शुल्क के रूप में भुगतान करती हैं। ये राशि 10 गुना तक बढ़ जाएगी।
बीमा कंपनियां भी सुरक्षा जोखिमों को ज्यादा मानते हुए बीमे की लागत बढ़ा सकती है या बीमे से ही इनकार कर सकती हैं।
विरोध
UN एजेंसी ने किया विरोध
वैश्विक जहाजरानी मानकों के लिए जिम्मेदार संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) ने अंतरराष्ट्रीय जलडमरूमध्य के लिए जरूरी शुल्क लागू करने का विरोध किया है।
संगठन ने कहा, "शुल्क के मुद्दे पर हमारा रुख हमेशा से एक जैसा रहा है- अंतरराष्ट्रीय नौवहन के लिए इस्तेमाल होने वाले जलडमरूमध्य से गुजरने के लिए शुल्क लेने के खिलाफ हम दृढ़ता से खड़े हैं। किसी जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों के लिए अनिवार्य टोल लगाने का कोई कानूनी आधार नहीं है।"