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चीन की मध्य-पूर्व में तनाव के बीच भारत से अपील, कहा- प्रतिद्वंद्वी के बजाय साझेदार समझें
चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने मध्य-पूर्व के तनाव के बीच भारत से खास अपील की है

चीन की मध्य-पूर्व में तनाव के बीच भारत से अपील, कहा- प्रतिद्वंद्वी के बजाय साझेदार समझें

Mar 08, 2026
01:42 pm

क्या है खबर?

इजरायल और अमेरिका के संयुक्त रूप से ईरान पर हमला करने के बाद मध्य-पूर्व में उपजे तनाव के बीच चीन ने भारत और चीन से सुधरते रिश्तों पर बड़ा बयान दिया है। चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने कहा कि भारत और चीन को एक-दूसरे को प्रतिद्वंद्वी के बजाय साझेदार और खतरे के बजाय अवसर के रूप में देखना चाहिए। उन्होंने यह बयान बीजिंग में आयोजित 14वीं नेशनल पीपुल्स कांग्रेस के सत्र के दौरान एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिया।

बयान

वांग ने क्या दिया बयान?

वांग यी ने भारतीय पत्रकार के एक सवाल पर कहा, "चीन और भारत महत्वपूर्ण पड़ोसी हैं और दोनों ही वैश्विक दक्षिण के हिस्से हैं, जिनके बीच गहरे सांस्कृतिक संबंध और व्यापक साझा हित हैं। चीन-भारत के बीच आपसी विश्वास और सहयोग साझा विकास के लिए बहुत फायदेमंद है। इसी तरह विभाजन और टकराव एशिया के पुनरुत्थान में सही नहीं हैं।" उन्होंने स्पष्ट किया कि दोनों देशों के रिश्ते अब सामान्य पटरी पर लौट आए हैं।

व्यापार

भारत से व्यापार को लेकर क्या बोले वांग?

वांग ने कहा, "पिछले साल अगस्त में तियानजिन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात हुई थी। कजान के बाद हुई बैठक ने भारत-चीन संबंधों को मधुर बनाया है। दोनों देशों के नेताओं के बीच सहमति को जमीनी स्तर पर लागू किया जा रहा है।" उन्होंने कहा, "विभिन्न स्तरों पर संवाद बढ़ा है और द्विपक्षीय व्यापार अब तक के नए सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है। इससे दोनों देशों की जनता को भी फायदा हुआ है।"

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प्राथमिकता

वांग ने सीमा पर शांति को दी प्राथमिकता

वांग यी ने संबंधों को मजबूत करने के लिए 4 मुख्य बिंदू भी साझा किए। उन्होंने कहा कि दोनों देशों को एक-दूसरे को प्रतिद्वंद्वी के बजाय साझेदार और खतरे के बजाय अवसर के रूप में देखना चाहिए। इसी तरह उन्होंने सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखने के साथ-साथ अच्छे पड़ोसी के धर्म को निभाने पर भी जोर दिया और विकास को सबसे बड़ा साझा आधार बताते हुए व्यावहारिक सहयोग के परिणाम दिखाने की बात कही।

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