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क्या है भारत की चेनाब-ब्यास सुरंग परियोजना, जिस पर तिलमिलाया पाकिस्तान?
हिमाचल प्रदेश में चेनाब-ब्यास सुरंग परियोजना पर शुरू होगा काम (फाइल तस्वीर)

क्या है भारत की चेनाब-ब्यास सुरंग परियोजना, जिस पर तिलमिलाया पाकिस्तान?

लेखन गजेंद्र
Jun 05, 2026
01:10 pm

क्या है खबर?

केंद्र सरकार अगस्त में चिनाब-ब्यास लिंक सुरंग परियजोना का काम शुरू करने जा रही है, जिसको लेकर पाकिस्तान के अंदर खलबली मच गई है। परियोजना के तहत हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति क्षेत्र में 8.7 किलोमीटर लंबी सुरंग का निर्माण होगा ताकि चिनाब नदी बेसिन का अतिरिक्त जल ब्यास नदी प्रणाली तक पहुंच सके। सिंधु जल समझौता रद्द होने से बिलबिला रहे पाकिस्तान के लिए यह दूसरा बड़ा झटका है। क्या है परियोजना और पाकिस्तान क्यों नाराज है? आइए, जानते हैं।

विरोध

पहले जानिए, पाकिस्तान ने क्या जताया विरोध

परियोजना के काम में तेजी आने से जुड़ी खबरों पर पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने गुरुवार को बयान दिया है। अंद्राबी ने कहा, "इस तरह की अंतर-बेसिन परियोजना सिंधु जल संधि का गंभीर उल्लंघन है। भारत ने इन परियोजनाओं को लेकर न कोई सूचना दी है और न नोटिस साझा किया है। इन परियोजनाओं से भारत पानी को हथियार के रूप में इस्तेमाल करना चाहता है, जिसका पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर परिणाम होगा।"

परियोजना

क्या है परियोजना?

सुरंग परियोजना का काम 1 अगस्त से शुरू होना है, जिसकी समयसीमा 31 जुलाई, 2029 है। परियोजना के तहत चंद्रा नदी (चिनाब नदी की ऊपरी सहायक, जो चिनाब बेसिन का हिस्सा) से अतिरिक्त पानी को ब्यास नदी बेसिन में मोड़ा जाएगा। पहले चरण में चंद्रा नदी पर कोक्सर गांव के पास 19 मीटर ऊंचा बैराज और सुरंग का काम होगा। इसके बाद जलविद्युत उत्पादन होगा। कुल 2,600 करोड़ रुपये की परियोजना को राष्ट्रीय हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर कॉरपोरेशन (NHPC) देख रही है।

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फायदे

परियोजना से भारत को क्या होगा फायदा?

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, चिनाब बेसिन का अतिरिक्त पानी, जो मानसून में बर्बाद होता है, उसे ब्यास प्रणाली में लाकर बेहतर उपयोग किया सकेगा। इससे पंजाब, हरियाणा, राजस्थान आदि राज्यों में अतिरिक्त पानी देने से कृषि उत्पादन बढ़ेगा, हिमाचल, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान में पेयजल संकट दूर होगा। साथ ही, करीब 4000 मेगावाट अतिरिक्त बिजली उत्पादन की संभावना है। परियोजना से एक साथ भारत की कई समस्याओं का समाधान होने की संभावना है।

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आपत्ति

परियोजना से पाकिस्तान को क्यों है आपत्ति?

चिनाब पश्चिमी नदी का पानी सिंधु जल संधि 1960 के तहत पाकिस्तान को आवंटित है और ब्यास पूर्वी पर भारत का अधिकार है। चिनाब सिंधु नदी प्रणाली का हिस्सा है, जिसका पानी पाकिस्तान पहुंचता है और इसके जल पर निर्भर है। पाकिस्तान के मुताबिक, परियोजना से सालाना 19 लाख एकड़ फीट पानी पाकिस्तान नहीं पहुंचेगा, जिससे उसे नुकसान होगा। पाकिस्तान ने इसे 1960 का घोर उल्लंघन बताया, जिसे भारत अप्रैल 2025 में पहलगाम हमले के बाद स्थगित कर चुका है।

नुकसान

पाकिस्तान को परियोजना से कितना होगा नुकसान?

यह परियोजना सफल होती है तो सिंधु नदी प्रणाली पर निर्भर पाकिस्तान की 80 प्रतिशत कृषि और अर्थव्यवस्था पर बड़ा नकारात्मक असर पड़ेगा। उसकी फसलें बर्बाद होंगी, खाद्य सुरक्षा पर संकट आएगा और हाइड्रोपावर उत्पादन घटेगा। पड़ोसी देश के लिए आर्थिक नुकसान और पानी की कमी दोनों पर असर दिखेगा। हालांकि, भारत का कहना है कि उसे अपने पास उपलब्ध जल संसाधनों का पूर्ण उपयोग करने का अधिकार है और वह अतिरिक्त पानी का उपयोग कर सकता है।

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