
विश्व एड्स दिवसः जब भारतीय सेक्स वर्कर की दास्तां सुन रो पड़े बिल गेट्स
क्या है खबर?
दुनिया के सबसे अमीर व्यक्तियों में शामिल बिल गेट्स भारत दौरे पर एक सेक्स वर्कर की कहानी सुनकर रो पड़े थे। एक नई किताब में इस घटना के बारे में बताया गया है।
यह कहानी एक सेक्स वर्कर की थी, जिसकी बेटी ने स्कूल में दिए जा रहे तानों की वजह से आत्महत्या कर ली थी।
यह जानकारी अशोक एलेक्जेंडर की किताब 'ए स्ट्रेंजर ट्रूथः लेसन इन लव, लीडरशिप एंड करेज फ्रॉम इंडियाज सेक्स वर्कर्स' में दी गई है।
कहानी
कहानी जिसको सुनकर रो पड़े थे बिल गेट्स
किताब में दिए गए एक किस्से के मुताबिक, यह साल 2000 के दशक की शुरुआत की बात है। बिल गेट्स और उनकी पत्नी भारत दौरे पर आए थे।
इस दौरान एक सेक्स वर्कर ने बताया कि उन्होंने अपनी बेटी को अपने इस काम के बारे में नहीं बताया था। उनकी बेटी हाई स्कूल में पढ़ती थी।
फिर उसके सहपाठियों को उसकी मां के काम के बारे में पता चला, तो उन्होंने लड़की को परेशान करना शुरू कर दिया।
घटना
सर झुकाकर रो रहे थे बिल
अपने सहपाठियों की बातें सुनकर लड़की डिप्रेशन में आ गई थी।
महिला ने बताया कि एक दिन जब वो घर लौटीं तो देखा कि उसकी बेटी पंखे से लटक रही थी। उसने अपने पीछे एक सुसाइड नोट छोड़ा था जिसमे लिखा था कि अब वह और सहन नहीं कर सकती और मौत को गले लगा रही है।
यह सुनकर बिल गेट्स रोने लग गए थे। लेखक ने लिखा है कि मेरे सामने बैठे बिल सर झुकाकर रो रहे थे।
किताब
किताब में है सेक्स वर्कर्स की दुनिया
बता दें कि एलेक्जेंडर ने 10 साल तक भारत में गेट्स फाउंडेशन के HIV/AIDS रोकथाम कार्यक्रम 'आवाहन' के प्रमुख के तौर पर काम किया है।
उन्होंने इस दौरान के अपने अनुभवों को किताब में लिखा है।
इस किताब में सेक्स वर्कर के जीवन, एड्स की रोकथाम में भारत के अभियान की सफलता, सेक्स वर्कर्स से सीखी जाने वाली नेतृत्व कुशलता और जीवन संदेश के बारे में लिखा गया है।
यह किताब जगरनॉट पब्लिकेशन ने प्रकाशित की है।
जानकारी
किताब में हैं कई दर्दभरी कहानियां
अपनी इस किताब में एलेक्जेंडर ने सेक्स वर्कर्स की दुनिया के बारे में लिखा है। इसमें बताया गया है कि कैसे महिलाएं खुद को 50 रुपए के लिए बेचने पर मजबूर होती हैं और 14 साल के बच्चों को ड्रग्स दिए जाते हैं।
जानकारी
क्या है बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन?
बिल गेट्स ने वर्ष 2000 में इस फाउंडेशन की शुरुआत की थी। इस फाउंडेशन का मकसद एक आदर्श HIV-निरोधक कार्यक्रम विकसित करना है।
साथ ही यह फाउंडेशन भारत में मातृत्व एवं बाल स्वास्थ्य, स्वास्थ्य एवं पोषण सेवाएं, कृषि विकास, स्वच्छता, संक्रामक रोगों की रोकथाम आदि क्षेत्रोें में काम कर रहा है।
इसके अलावा फाउंडेशन उन राष्ट्रीय HIV कार्यक्रमों को भी सहायता देता है जो भारत, चीन, म्यांमार और बोत्सवाना में चलाये जा रहे हैं।