होर्मुज के बाद बाब अल-मंदेब के बंद होने का खतरा; ये कितना अहम, क्या होगा असर?
क्या है खबर?
शनिवार को ईरान समर्थित यमन के हूती विद्रोहियों ने कहा कि उन्होंने इजरायल पर हमला किया है। ईरान के खिलाफ चल रहे युद्ध में ये पहली बार है, जब हूती विद्रोहियों ने कोई हमला किया है। युद्ध में हूतियों के प्रवेश से दुनिया के चौथे सबसे बड़े शिपिंग मार्ग बाब अल-मंदेब के बंद होने का खतरा मंडरा रहा है। अगर ऐसा हुआ तो दुनियाभर में ऊर्जा संकट और गहरा सकता है।
बाब अल-मंदेब
कहां है बाब अल-मंदेब?
बाब अल-मंदेब अरब प्रायद्वीप और हॉर्न ऑफ अफ्रीका के बीच स्थित एक संकरा समुद्री मार्ग है। यह उत्तर-पश्चिम में लाल सागर को दक्षिण-पूर्व में अदन की खाड़ी और अरब सागर या हिंद महासागर से जोड़ता है। यह करीब 32 किलोमीटर चौड़ा जलडमरूमध्य है, जो लाल सागर से स्वेज नहर तक का दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल है। यहा हिंद महासागर से लाल सागर में प्रवेश करने का इकलौता रास्ता है।
अहमियत
कितना अहम है बाब अल-मंदेब?
बाब अल-मंदेब फारस की खाड़ी से वैश्विक बाजारों तक कच्चे तेल, पेट्रोलियम उत्पादों और LNG की आवाजाही के लिए बेहद अहम है। यहां से वैश्विक व्यापार का लगभग 10-12 प्रतिशत और वैश्विक कंटेनर यातायात का लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है। यूरोप-एशिया के बीच ऊर्जा और माल ढुलाई की प्रमुख लाइफलाइन है। स्वेज नहर तक पहुंचने का मुख्य रास्ता है। हर रोज यहां से लगभग 4.2 मिलियन बैरल तेल गुजरता है। यह वैश्विक समुद्री तेल व्यापार का 6-9 प्रतिशत है।
असर
बाब अल-मंदेब बंद हुआ तो क्या होगा असर?
आमतौर पर बाब अल-मंदेब से रोजाना 70-75 जहाज गुजरते हैं। सालाना इस रास्ते से करीब 20,000 से ज्यादा जहाज गुजरते हैं। अगर ये रास्ता बंद हुआ तो ऑयल टैंकर, LNG शिप और कंटेनर जहाजों की आवाजागही प्रभावित होगी। जहाजों को अफ्रीका से घूमकर जाना पड़ेगा, जिससे 10-15 दिन का समय बढ़ जाएगा और लागत भी 30-40 प्रतिशत तक बढ़ सकती है। होर्मुज के बंद होने से पहले ही चरमराई समुद्री यातायात व्यवस्था के लिए ये बड़ा झटका होगा।
भारत
भारत पर क्या होगा असर?
भारत अपनी जरूरत का 85 प्रतिशत कच्चा तेल और 60 प्रतिशत LPG आयात करता है। होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से भारत को मिलने वाले 45 प्रतिशत कच्चे तेल और 90 प्रतिशत LPG की आपूर्ति पहले ही चरमरा चुकी है। अगर बाब अल-मंदेब बंद हुआ, तो यूरोप और अफ्रीका के साथ होने वाला भारत का व्यापार पूरी तरह ठप हो जाएगा। भारत को ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए महंगे वैकल्पिक स्रोतों की ओर रुख करना होगा।
विशेषज्ञ
क्या कह रहे हैं विशेषज्ञ?
NDTV से बात करते हुए जहाज कंपनी GMS के वाइस प्रेसिडेंट नईम नूर ने कहा, "लगातार मिसाइल या ड्रोन के खतरे जहाजों को दूसरे रास्ते से जाने पर मजबूर कर सकते हैं। इससे यात्रा का समय और लागत बढ़ जाती है। अगर बाब अल-मंदेब पर दबाव पड़ता है, तो इसका नतीजा तेल से कहीं आगे तक जाता है और यह समुद्री ट्रेड में बहुत बड़ी रुकावट का मुद्दा बन जाता है।"