पश्चिम बंगाल: 5 महीने की नन्हीं बच्ची ने बनाया विश्व रिकॉर्ड, पहचाने 12 फ्लैशकार्ड
क्या है खबर?
जिस उम्र में बच्चे घिसटकर चलना शुरू करते हैं, उस उम्र में पश्चिम बंगाल की एक नन्हीं-सी बच्ची ने विश्व रिकॉर्ड कायम कर दिखाया है। महज 5 महीने की उम्र में इस बच्ची ने ऐसा कमाल कर दिखाया कि पूरी दुनिया दंग रह गई है। अभी बच्ची ने बोलना तक नहीं सीखा है, लेकिन उसका नाम विश्व रिकॉर्ड की किताब में दर्ज हो गया है। दरअसल, बच्ची ने सबसे छोटी उम्र में 12 काले-सफेद फ्लैशकार्ड पहचानने का रिकॉर्ड बनाया है।
रिकॉर्ड
सर्टिफिकेट और मेडल पा कर खुश हुई इनाया
इस बच्ची का नाम इनाया अफरोज है, जो 5 महीने और 21 दिन की है। वह पश्चिम बंगाल के हुगली जिले स्थित खानाकुल की रहने वाली है।
बच्ची का दिमाग इतना तेज है कि वह कई तरह की तस्वीरें पहचान लेती है। उसके परिवार ने बताया कि 'बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड' ने '12 फ्लैशकार्ड पहचानने वाले सबसे कम उम्र के बच्चे' की श्रेणी में उसे मान्यता दी।
रिकॉर्ड की पुष्टि करने वाला सर्टिफिकेट और मेडल डाक के जरिए मिला था।
इनाया
मां की मेहनत लाई रंग
इनाया की इन क्षमताओं का श्रेय उसकी मां शबनूर सुल्ताना की निरंतर मेहनत और परवरिश को जाता है। जब इनाया महज 3 महीने की थी तब से ही शबनूर ने उसे पक्षियों, जानवरों और कुछ आम वस्तुओं की तस्वीरें दिखाना शुरू कर दिया था।
धीरे-धीरे उन्होंने काले-सफेद फ्लैशकार्ड का इस्तेमाल करके बच्ची को अलग-अलग तस्वीरों से परिचित कराया। इनाया को भी इसमें मजा आने लगा, जिससे उसके लिए इन्हें पहचानना आसान होता गया।
परिवार
परिवार की खुशी का नहीं है ठिकाना
इनाया के परिवार के सदस्यों का कहना है कि उन्होंने उसमें सीखने की जिज्ञासा और रुचि तब देखी, जब वह केवल कुछ महीने की ही थी। उनका मानना है कि उसकी मां के नियमित अभ्यास, धैर्य और प्रोत्साहन ने उसे यह उपलब्धि हासिल करने में मदद की है।
इनाया को चीजें सिखाते हुए शबनूर ने कुछ वीडियो भी रिकॉर्ड किए थे, जो विश्व रिकॉर्ड की टीम को भेजे गए थे।
श्रेय
पिता को है बेटी पर गर्व
इनाया की मां ने कम उम्र में ही उसकी मानसिक क्षमताओं को पहचाना, उन्हें पोषित किया और निरंतर प्रयास किए। इसके चलते ही यह छोटी-सी बच्ची यह कमाल करने में कामयाब हो सकी।
परिवार का सहायक माहौल और उम्र के हिसाब से विकास को बढ़ावा देने से इनाया की स्वाभाविक जिज्ञासा बढ़ पाई होगी। इनाया के पिता, शेख नाजेस अफरोज, केरलम में काम करते हैं।
घर से दूर होने के बावजूद, वह बेटी की उपलब्धि से बहुत खुश हैं।