इस 100 साल पुराने दुर्लभ फूलदान ने तोड़े नीलामी के रिकॉर्ड, 53 लाख रुपये में बिका
क्या है खबर?
सभी फूलदान फूलों को रखने और घर की सजावट करने के ही काम आते हैं। हालांकि, कुछ को इतनी खूबसूरती से बनाया जाता है कि उनकी कीमत हजारों नहीं, बल्कि लाखों में लगती है। ऐसा ही एक फूलदान बीते दिन नीलाम हुआ है, जिसने नीलामी के पिछले रिकॉर्ड तोड़ डाले हैं। हम बात कर रहे हैं 100 साल पुराने मूरक्रॉफ्ट के फूलदान की, जो 53 लाख रुपये में बिका है। आइए इसकी नीलामी के बारे में विस्तार से जानें।
नीलामी
कहां हुई इस फूलदान की नीलामी?
इस नीलामी का आयोजन इंग्लैंड के कोट्सवोल्ड स्थित किंगहैम्स नामक नीलामीघर ने करवाया था। माना जाता है कि इस सुंदर से दिखने वाले दुर्लभ फूलदान को किसी प्रदर्शनी के लिए बनाया गया था। नीलामीघर का अनुमान था कि इसकी कीमत 19 से 31 लाख रुपये के बीच लग सकती है। हालांकि, यह 53 लाख रुपये से अधिक में नीलाम हुआ और 40 लाख रुपये में बिकने वाले एक फूलदान के पिछले रिकॉर्ड को तोड़ने में कामयाब रहा।
फूलदान
100 साल पहले खास कारण से डिजाइन हुआ था यह फूलदान
आपको जानकर हैरानी होगी कि यह दुर्लभ फूलदान लगभग 1925 के आसपास बनाया गया था। इसे मूरक्रॉफ्ट के संस्थापक विलियम मूरक्रॉफ्ट द्वारा डिजाइन किया गया था। मूरक्रॉफ्ट एक प्रसिद्ध ब्रिटिश कंपनी है, जो मिट्टी के बर्तन बनाती है। इस खास फूलदान का निर्माण इंग्लैंड के स्टोक-ऑन-ट्रेंट नामक शहर में किया गया था, जो अपने मिट्टी के बर्तनों के उद्योग के लिए जाना जाता है। इसे फूल रखने के बजाय प्रदर्शित करने के लिए बनाया गया था।
विवरण
क्या है इस फूलदान की खासियत?
इस फूलदान की ऊंचाई 38.5 सेंटीमीटर है और इसे गहरे नीले रंग में बनाया गया है। पूरे फूलदान पर एक खूबसूरत-सा ज्वाला परिदृश्य पैटर्न बनाया गया है, जो इसकी खूबसूरती में चार चांद लगाने का काम करता है। इसमें गहरे नीले, हल्के नीले, गहरे हरे, हल्के हरे और गुलाबी जैसे कई रंगों का इस्तेमाल हुआ है, जिन्होनें मिलकर परिदृश्य को जीवंत बनाया है। यही वजह है कि इसे खरीदने के लिए लोग लाखों रुपये देने को तैयार थे।
खरीदार
कई लोग बने थे नीलामी का हिस्सा
इस फूलदान को खरीदने के लिए कई लोगों ने दिलचस्पी दिखाई थी और वे बढ़-चढ़कर नीलामी का हिस्सा बने थे। बोली लगाने वालों के बीच होड़-सी मच गई थी, क्योंकि सभी इस नायाब वस्तु को हासिल करना चाहते थे। कई लोगों ने फोन पर बोली लगाई तो कई ने ऑनलाइन बोली बढ़ाई। अंत में ब्रिटेन स्थित एक निजी संग्राहक ने बाजी मार ली, जिनकी पहचान गुप्त ही रखी गई है।