जापानी व्यक्ति ने पेश की साहस की मिसाल, मरने के 2 दिन बाद की भावुक पोस्ट
क्या है खबर?
जब कोई व्यक्ति दुनिया को अलविदा कह जाता है तो उनके प्रियजन उनकी याद में पोस्ट करते हैं। हालांकि, क्या आप मान सकते हैं कि कोई व्यक्ति मरने के बाद खुद ही सोशल मीडिया पर पोस्ट करेगा? जापान में एक ऐसा ही हैरतअंगेज मामला सामने आया है। दरअसल, यहां के एक व्यक्ति ने मरने के 2 दिन बाद एक भावुक पोस्ट साझा की। इसे पढ़कर लोगों की आखें नम हो गईं और कुछ तो हक्के-बक्के रह गए।
मामला
आखें बंद होने से पहले शेड्यूल कर गए थे पोस्ट
इस व्यक्ति का नाम कनारू नाकायामा था, जिनका साहस देखकर लोग भावुक हो रहे हैं। 22 साल के नाकायामा की 12 अक्टूबर, 2025 को कैंसर से लड़ते हुए मौत हो गई थी। उनकी पीठ पर एक बड़ा ट्यूमर था, जिसने उनके शरीर को अंदर से तोड़ दिया। हालांकि, बीमारी उनका साहस तोड़ने में सफल नहीं हो सकी। उन्होंने मरने से पहले एक पोस्ट शेड्यूल कर दी थी, जो 2 दिन बाद उनके सोशल मीडिया अकाउंट पर नजर आई थी।
पोस्ट
क्या था नाकायामा का दिल छू लेने वाला पोस्ट?
नाकायामा '@nkym7856' नाम से अकाउंट चलाते थे, जिसके जरिए उन्होंने अपने करीबियों को अपने देहांत की खबर दी। उन्होंने पोस्ट में केवल इतना लिखा, "मैं मर गया।" उनका यह आखरी संदेश 30 करोड़ से ज्यादा लोगों तक पहुंचा और 86 हजार लोगों ने उसे रिपोस्ट किया। कई लोगों ने कहा कि वे मौत के प्रति नौजवान के आशावादी रवैये से बहुत प्रभावित हुए। लोगों ने नाकायामा को श्रद्धांजलि भी दी और उनकी आत्मा की शांति की कामना भी की।
पिता
पिता को नजर आया बेटे का एक अलग रूप
पोस्ट देखने के बाद कई लोगों ने नाकायामा के नाम पर पैसे भी दान किए। ये पैसे उनके परिवार को दिए गए, जो उनकी शोक सभा में काम आएंगे। नाकायामा के पिता ने जब यह पोस्ट देखा तो मानो उनके दिल पर खंजर चल गए थे। उन्हें इसके बारे में तब मालूम चला जब उनके बेटे के एक सहपाठी ने इसका जिक्र किया था। हालांकि, उन्हें इस पोस्ट के जरिए अपने बेटे में एक अलग इंसान नजर आया।
नाकायामा
कैसा था नाकायामा का स्वभाव?
नाकायामा के पिता एक किसान हैं, जिन्होनें उन्हें बड़े ही नाजों से पाला था। नाकायामा बचपन से ही शांत स्वभाव के थे और अपना सारा समय अपने कमरे में पढ़ते हुए या खेलते हुए बिताते थे। उन्हें जब चोट लग जाया करती थी तब भी वह कभी रोते नहीं थे। उनके पिता को हमेशा डर रहता था कि वह कभी दोस्त नहीं बना पाएंगे। उनकी अपने में रहने की आदत भी पिता को बहुत परेशान करती थी।
ट्यूमर
ट्यूमर नहीं तोड़ पाया नाकायामा की हिम्मत
नाकायामा ने 2023 में होक्काइदो विश्वविद्यालय में कृषि की पढ़ाई करने के लिए प्रवेश लिया था। उनके देहांत के बाद उनके शिक्षक ने बताया, "उन्होंने खेती में पिता का हाथ बटाने के लिए यह विषय चुना था।" उनकी हिम्मत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि ट्यूमर का पता चलने के बाद भी वह डरे नहीं थे। उन्होंने ट्यूमर को 'बिग गाय' नाम दे दिया था और अक्सर अस्पताल से अपनी तस्वीरें साझा करते रहते थे।