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मैराथन में साड़ी पहनकर सबसे तेज दौड़ी भारतीय महिला, कायम किया नया विश्व रिकॉर्ड
साड़ी में मैराथन दौड़ने वाली महिला

मैराथन में साड़ी पहनकर सबसे तेज दौड़ी भारतीय महिला, कायम किया नया विश्व रिकॉर्ड

लेखन सयाली
Apr 21, 2026
11:18 am

क्या है खबर?

साड़ी भारतीय महिलाओं की पहचान है, जो उन्हें सशक्त बनाती है। इस बात को इंग्लैंड में रहने वाली भारतीय मूल की महिला ने एक बार फिर सच साबित कर दिखाया है। 46 वर्ष की मधुस्मिता जेना दास ने साड़ी पहनकर मैराथन दौड़ में भाग लिया और सबसे तेज दौड़कर एक नया विश्व रिकॉर्ड कायम किया। उनके इस रिकॉर्ड ने हजारों महिलाओं को प्रेरित किया है। आइए उनके रिकॉर्ड के बारे में विस्तार से जानते हैं।

मामला

12 मिनट के अंतर से तोड़ा पिछला रिकॉर्ड

स्टॉकपोर्ट की रहने वाली मधुस्मिता रविवार को मैनचेस्टर मैराथन का हिस्सा बनी थीं। उन्होंने इस दौड़ को 3 घंटे और 45 मिनट का समय लेकर पूरा कर दिखाया। इस दौरान उन्होंने एक खूबसूरत-सी लाल रंग की साड़ी पहनी हुई थी, जिस पर फूलों वाला प्रिंट था। उन्होंने अपने इस प्रयास से पिछले रिकॉर्ड को 12 मिनट से भी अधिक के अंतर से तोड़ दिया। इस कमाल के चलते उनका नाम गिनीज बुक में शुमार हो गया है।

मैराथन

किस लक्ष्य के साथ मैराथन में शामिल हुई थीं मधुस्मिता?

मैराथन वाले दिन मधुस्मिता पूरे जोश में थीं और वहां मौजूद लोगों ने बढ़-चढ़कर उनकी हौसला अफजाई की। वह दुनिया को यह संदेश देना चाहती थीं कि सभी जातीय पृष्ठभूमि की महिलाएं अपनी पसंद के अनुसार किसी भी पोशाक में दौड़ में भाग ले सकती हैं। उस दिन मधुस्मिता को लोगों का खूब समर्थन मिला, जिसने उन्हें भावुक कर दिया। 2 बच्चों की मां होने के बावजूद भी उन्होंने अपने सपनों की उड़ान जारी रखी और दुनियाभर में नाम कमाया।

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बयान

40 से ज्यादा मैराथन दौड़ चुकी हैं मधुस्मिता

मधुस्मिता एक विशेष शैक्षिक आवश्यकता वाली शिक्षिका हैं और अब तक कुल 42 मैराथन दौड़ चुकी हैं। उन्होंने भारत की क्रांति साल्वी द्वारा बनाए गए 3 घंटे, 57 मिनट और 7 सेकंड के पिछले रिकॉर्ड को तोड़ा है, जो सितंबर 2018 में जर्मनी में कायम हुआ था। मधुस्मिता ने बताया, "दक्षिण एशियाई मूल के अन्य लोग स्टॉकपोर्ट और मैनचेस्टर जैसी जगहों से मुझे संदेश भेज रहे हैं और कह रहे हैं कि वे अब दौड़ना शुरू करना चाहते हैं।"

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दौड़

भारतीय महिलाओं के लिए प्रेरणा बन गई हैं मधुस्मिता

21 किलोमीटर दौड़ने के बाद मधुस्मिता खुद को समझा रही थीं कि चलती रहो और ज्यादा उत्साहित मत हो। हालांकि, 30 किलोमीटर के करीब पहुंचते-पहुंचते उन्हें लगा कि वह रिकॉर्ड के लिए चुनौती पेश कर सकती हैं। बस फिर क्या था, उन्होंने हिम्मत जुटाई और कमाल कर दिखाया। मधुस्मिता ने बताया, "भारतीय पुरुषों ने मुझे बताया कि मेरा पॉडकास्ट सुनने के बाद उनकी पत्नियां दौड़ना चाहती थीं।" उन्होंने दौड़कर अपने स्कूल के बच्चों के लिए 2.90 लाख रुपये भी जुटाए।

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