बच्चों की जगह गुड्डे-गुड़िया पाल रहे हैं Gen-Z, आखिर क्या है यह विचित्र ट्रेंड?
क्या है खबर?
बच्चे गुड्डे-गुड़िया से खेलना पसंद करते हैं, लेकिन बड़े भी ऐसा करने लगें तो अजीब लगता है। यह Gen-Z के बीच एक नया लोकप्रिय ट्रेंड है, जिसमें वे बच्चों की जगह गुड्डे-गुड़िया पाल रहे हैं। वे इन खिलौनों को अपने बच्चों की तरह ही रखते हैं और उनकी पूरी शिद्दत से देखभाल करते हैं। उनकी दिनचर्या में इन गुड्डे-गुड़िया को खिलाना, सुलाना, पढ़ाना और यहां तक कि उनके डाइपर बदलना तक शामिल है।
मामला
क्या है यह अजीब ट्रेंड?
यह ट्रेंड Gen-Z महिलाओं के बीच खास तौर से प्रसिद्ध है। इसे 'दर्द रहित पेरेंटिंग' नाम दिया जा रहा है, जिसमें रुई से भरे गुड्डे-गुड़िया को बच्चों की तरह अपने पास रखा जाता है। इससे जुड़े कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते हैं, जिसमें लोग अपने गुड्डे-गुड़िया का जन्मदिन मनाते हैं या उनकी दिनचर्या साझा करते हैं। ये लोग इन खिलौनों पर लाखों रुपये तक खर्च कर डालते हैं, जो आम तौर पर बच्चों की देखभाल में लगते हैं।
एशिया
एशिया में कैसे हुई इस ट्रेंड की शुरुआत?
यह ट्रेंड सबसे ज्यादा एशिया के देशों में देखने को मिल रहा है, जिनमें चीन, जापान और दक्षिण कोरिया शामिल हैं। यहां इसकी शुरुआत 2016 में हुई थी, जब कोरियाई आइडल ग्रुप EXO के प्रशंसकों ने किम जोंग-डे की एक गुड़िया बनाई थी। इसके बाद भारी मात्रा में लोगों से प्रेरित गुड़िया बनने लगीं, जो सेलिब्रिटीज या एनिमे पात्रों पर आधारित थीं। लोग इन्हें बच्चों की तरह गोद लेने लगे और 'डॉल मम्मी' या 'डॉल पापा' कहलाए जाने लगे।
खर्च
गुड़िया को पालने में आता है हजारों का खर्चा
जब तक इन Gen-Z लोगों के आर्डर किए हुए गुड्डे-गुड़िया घर नहीं आते हैं, तब तक वे खुद को गर्भवती बताते हैं। सभी लोग पहले एक साधारण गुड़िया से शुरुआत करते हैं, फिर उसके लिए कपड़ों से लेकर बाल तक खरीदते हैं। कई गुड़िया पालने वाली माताएं अपने खिलौनों के लिए कपड़े, विग, जूते और अन्य सामान खरीदने पर हजारों रुपये खर्च करती हैं। इन गुड्डे-गुड़िया के लिए दूध की बोतल, फार्मूला वाला दूध और डाइपर तक खरीदे जाते हैं।
कारण
क्या है गुड्डे-गुड़िया पालने की वजह?
एक सर्वे से सामने आया है कि 85 प्रतिशत लोग प्यारे और मनमोहक रूप के कारण गुड्डे-गुड़िया पालते हैं। जबकि, 58 प्रतिशत लोगों ने भावनात्मक लगाव को एक प्रमुख वजह बताया। एक व्यक्ति ने कहा, "गुड़िया में जान नहीं होती, बल्कि उसे प्यार देने से उसमें जान आती है।" कई लोग खास वजह से कोरियाई आइडल जैसी गुड़िया पालते हैं। उनका कहना है कि ये सितारे हमें कभी नहीं मिल सकते तो हम उनके जैसी गुड़िया ही साथ रखते हैं।
अन्य देश
अमेरिका और यूरोप में भी बढ़ रहा यह ट्रेंड
केवल एशिया के ही नहीं, बल्कि कई अन्य देशों के लोग भी गुड्डे-गुड़िया के माता-पिता बन रहे हैं। इनमें अमेरिका और यूरोप के कई देश भी शामिल हैं। यहां के लोग रुई की नहीं, बल्कि असली बच्चों जैसी दिखने वाली गुड़िया पालते हैं। इन्हें रीबॉर्न गुड़िया कहा जाता है, जिन्हें देखकर आप कह ही नहीं सकते कि वे असली बच्चे नहीं हैं। इन्हें ज्यादातर वो महिलाएं पाल रही हैं, जो मां बनने का सुख नहीं प्राप्त कर पाई थीं।