#NewsBytesExclusive: प्रिंस यादव 18 साल तक लेदर गेंद से नहीं खेले, कैसे भारतीय टीम तक पहुंचे?
क्या है खबर?
भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने इंग्लैंड और आयरलैंड दौरे के लिए भारतीय क्रिकेट टीम का ऐलान किया है। 29 वर्षीय तेज गेंदबाज प्रिंस यादव को पहली बार टी-20 अंतरराष्ट्रीय टीम में मौका मिला है। वह अफगानिस्तान के खिलाफ वनडे टीम में भी टीम का हिस्सा हैं। 18 साल की उम्र तक प्रिंस ने लेदर गेंद से क्रिकेट नहीं खेला था। उनके कोच अमित वशिष्ठ ने न्यूजबाइट्स से बातचीत में उनके संघर्ष, अनुशासन और सफलता की कहानी साझा की है।
प्रतिभा
कोच ने किस तरह पहचानी थी प्रिंस की प्रतिभा?
प्रिंस के कोच वशिष्ठ ने कहा, "मैं एक दिन बाइक से जा रहा था। रास्ते में कुछ लड़के टेनिस बॉल से क्रिकेट खेल रहे थे। तभी मेरी नजर प्रिंस पर पड़ी। मैं रुककर उसका खेल देखने लगा। उस समय वह लगातार यॉर्कर डाल रहा था।" उन्होंने कहा, "क्रिकेट कोचिंग में मेरा लंबा अनुभव रहा है, इसलिए उसकी गेंदबाजी देखकर मुझे लगा कि इस लड़के में अलग प्रतिभा है। उसके बाद मैंने अपनी एकेडमी के खिलाड़ियों को भेजकर उसे बुलवाया था।"
गेंद
"प्रिंस ने कभी नहीं खेला था लेदर गेंद से क्रिकेट"
कोच वशिष्ठ ने कहा, "प्रिंस जब मेरे पास आया तो उसने बताया कि उसने कभी लेदर गेंद से क्रिकेट नहीं खेला है। मैंने उससे कहा कि मैं उसे सिखाऊंगा। उसकी यॉर्कर और गेंदबाजी की लय देखकर हमने उस पर काम शुरू किया। उस समय वह करीब 18 साल का था। उसका अनुशासन और फोकस सबसे बड़ी ताकत है। भारतीय टीम में चयन के बाद उसने कहा कि आपने अब तक जो सिखाया है, मैं उसी पर ध्यान दे रहा हूं।"
परिवार
पढ़ाई में कैसे थे प्रिंस?
कोच वशिष्ठ ने प्रिंस के परिवार के बारे में कहा, "प्रिंस के पिता सरकारी विभाग में थे और अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं। प्रिंस पढ़ाई में शुरू से काफी अच्छा था, इसलिए परिवार चाहता था कि उसकी कोई अच्छी नौकरी लग जाए, लेकिन उसका सपना क्रिकेट खेलना था। उसने टेनिस बॉल क्रिकेट बहुत खेला है। सूरत, मुंबई और कोलकाता जैसे शहरों में जाकर भी टेनिस बॉल टूर्नामेंट खेले। उसके अंदर क्रिकेट के प्रति जुनून शुरू से था।"
मेहनत
"सुबह 4 बजे मैदान पर पहुंच जाते हैं प्रिंस"
भारतीय तेज गेंदबाज के बारे में कोच वशिष्ठ ने बताया, "वह बेवजह दोस्ती या दिखावे में नहीं पड़ता है। बहुत कम लोग जानते हैं कि वह सुबह 4 बजे मैदान पहुंच जाता है और 7 बजे तक अभ्यास करता है।" उन्होंने बताया, "जब बाकी खिलाड़ी मैदान पर आने लगते हैं, तब प्रिंस घर जाकर आराम से सो जाता है। इसके बाद शाम में 4 बजे फिर मैदान पर आता है और 2 से 3 घंटे अभ्यास करता है।"
योजना
प्रिंस को भारतीय टीम तक पहुंचाने में काम आई यह योजना
प्रिंस के अभ्यास को लेकर उनके कोच ने कहा, "हमने कभी बिना योजना के केवल गेंदबाजी नहीं कराई। हर सत्र का एक स्पष्ट उद्देश्य होता था। उदाहरण के लिए 15 ओवर के अभ्यास को 3 हिस्सों में बांटते थे। पहले 5 ओवर हार्ड लेंथ पर, अगले 5 ओवर आगे स्विंग पर और आखिरी 5 ओवर यॉर्कर पर काम करते थे। केवल घंटों गेंदबाजी कराने से फायदा नहीं होता। प्रिंस ने हमेशा उसी योजना के अनुसार मेहनत की है।"
सफलता
सफलता मिलने के बाद कितना बदल गए प्रिंस?
इस सवाल के जवाब में वशिष्ठ ने कहा, "उसका स्वभाव आज भी वैसा ही है। वह जमीन से जुड़ा हुआ लड़का है। हाल ही में जब वह मैदान पर आया तो उसने ग्राउंड स्टाफ के सभी लोगों से मुलाकात की। सबके फोन में अपना नंबर सेव कराया और कहा कि किसी भी तरह की जरूरत हो तो सीधे मुझे फोन करना। उसने कई लोगों को उपहार भी दिए। इतनी सफलता के बाद भी उसका व्यवहार बिल्कुल नहीं बदला है।"
युवाओं
ऐसे बदल गया प्रिंस का करियर
प्रिंस के कोच के अनुसार दिल्ली प्रीमियर लीग (DPL) और अंडर-19 क्रिकेट ने प्रिंस के करियर को बदला। DPL में उसके प्रदर्शन ने उसे बड़े मंच तक पहुंचाया और वहीं से उसके करियर की दिशा बदल गई। कोच ने आगे कहा कि हर युवा को प्रिंस से सिखना चाहिए कि प्रतिभा जरूरी है, लेकिन केवल प्रतिभा से कोई खिलाड़ी यहां तक नहीं पहुंचता। उसने लगातार मेहनत की और कभी शॉर्टकट नहीं अपनाया। यही उसकी सफलता का सबसे बड़ा कारण है।
जानकारी
ऐसा रहा है प्रिंस का करियर
प्रिंस ने 2 प्रथम श्रेणी और 14 लिस्ट-A क्रिकेट मैच खेले हैं। प्रथम श्रेणी में उन्होंने 1 विकेट और लिस्ट-A में 29 विकेट चटकाए हैं। IPL में इस खिलाड़ी ने 20 मैच की 20 पारियों में 36 की औसत से 19 विकेट विकेट लिए हैं।