IPL के संस्थापक ललित मोदी 16 साल बाद भारत लौटने की तैयारी में, जानिए क्या बोले
क्या है खबर?
इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) के संस्थापक और पूर्व चेयरमैन ललित मोदी ने 16 साल बाद भारत लौटने की इच्छा जताई है। उन्हें IPL 2009 के दक्षिण अफ्रीका फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट (FEMA) मामले में बड़ी राहत मिली है। 2010 से भारत से बाहर रह रहे मोदी ने कहा कि फैसले के बाद 16 साल से चल रही कानूनी लड़ाई खत्म हो गई है। इसके बाद अब उन्होंने भारत वापसी की योजना बनाई है। आइए पूरी खबर पर नजर डालते हैं।
बयान
मोदी ने क्या कहा?
मोदी ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि वह इस साल के अंत तक या अगले साल की शुरुआत में भारत लौट आएंगे।
उन्होंने कहा, "मैं कल आए फैसले से बहुत खुश हूं। यह मेरे लिए शानदार दिन रहा। मैंने 16 साल तक लड़ाई लड़ी और मीडिया व सभी लोगों से जो बातें कहता रहा वह आखिरकार सच साबित हुईं। मैं खुश हूं कि ट्रिब्यूनल ने मेरे पक्ष में फैसला दिया। मेरी चिंता सिर्फ IPL की भलाई को लेकर थी।"
पीछे
इस कारण भारत आएंगे मोदी
मोदी ने कहा कि IPL की भलाई हमेशा उनके लिए सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण रही है।
उन्होंने आगे कहा, "अब वह अध्याय मेरे पीछे छूट चुका है। मैं अपनी जिंदगी में आगे बढ़ना चाहता हूं और भारत वापस आने को लेकर उत्साहित हूं।"
उन्होंने बताया कि वह जल्द भारत लौट सकते हैं।
उन्होंने कहा, "मेरी बेटी अक्टूबर में मेरे पोते को जन्म देने वाली है। उम्मीद है कि सब कुछ अच्छा रहेगा और मैं भारत वापस आ जाऊंगा।"
मामला
क्या था मामला?
साल 2009 में जब आम चुनावों के साथ तारीखों के टकराव के कारण IPL का आयोजन भारत की जगह दक्षिण अफ्रीका में कराया गया था।
इस दौरान टूर्नामेंट के आयोजन के लिए विदेश में भेजी गई रकम को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कार्रवाई शुरू की थी।
ED का आरोप था कि इस तरह रकम भेजने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से मंजूरी लेना जरूरी था।
इसी मामले में मोदी और अन्य के खिलाफ जांच शुरू हुई थी।
मामला
2 मामलों में ट्रिब्यूनल ने ED को सही माना
ट्रिब्यूनल ने ED की बात को 2 मामलों में सही माना। BCCI पर 4 करोड़ रुपये का जुर्माना बरकरार रखा गया, क्योंकि उसने अपने खातों में दर्ज राशि से ज्यादा रकम भेजी थी।
टिकट बिक्री से मिली रकम भारत वापस लाने में हुई देरी के मामले में भी ट्रिब्यूनल ने ED के निष्कर्ष को स्वीकारा।
हालांकि, बाद में रकम भारत वापस आ जाने के कारण BCCI का जुर्माना 4 करोड़ रुपये से घटाकर 1 करोड़ रुपये कर दिया गया।