यूट्यूब ने AI डीपफेक डिटेक्शन टूल का किया विस्तार, राजनेता और पत्रकारों किया शामिल
क्या है खबर?
यूट्यूब ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से निर्मित डीपफेक वीडियो की पहचान करने वाली अपनी समानता पहचान तकनीक का विस्तार करते हुए सरकारी अधिकारियों, राजनीतिक उम्मीदवारों और पत्रकारों के समूह को शामिल किया है। इस समूह के सदस्यों को एक ऐसे टूल तक पहुंच प्राप्त होगी, जो अनधिकृत AI से निर्मित कंटेंट का पता लगाता है। अगर, उन्हें लगता है कि यह यूट्यूब की नीति का उल्लंघन करती है तो वे इसे हटाने का अनुरोध कर सकते हैं।
तरीका
ऐसे काम करती है यह तकनीक
इस तकनीक को पहले के परीक्षणों के बाद पिछले साल यूट्यूब पार्टनर प्रोग्राम में लगभग 40 लाख यूट्यूब क्रिएटर्स के लिए लॉन्च किया गया था। इसे AI द्वारा जनरेट किए गए उन वीडियो का पता लगाने के लिए डिजाइन किया गया है, जो किसी व्यक्ति के चेहरे की नकल करते हैं। यह सिस्टम यूट्यूब की कंटेंट ID तकनीक के समान काम करता है। टूल किसी व्यक्ति की शक्ल से मिलती-जुलती दृश्य समानताओं के लिए कंटेंट को स्कैन करता है।
कार्रवाई
समीक्षा के बाद कंपनी हटाएगी कंटेंट
सिस्टम किसी प्रतिभागी की शक्ल वाली AI-जनरेटेड कंटेंट का पता लगाता है तो वह व्यक्ति वीडियो की समीक्षा कर सकता है और अगर, यह यूट्यूब के गोपनीयता दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करता है तो इसे हटाने का अनुरोध कर सकता है। कंपनी समीक्षा के बाद सही लगने पर ही वह कंटेंट हटाता है। इस प्रक्रिया का उद्देश्य सार्वजनिक हस्तियों को उन मामलों से निपटने में मदद करना है, जहां AI का उपयोग डीपफेक कंटेंट बनाने के लिए किया जाता है।