अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन को नोबेल शांति पुरस्कार का दावेदार क्यों चुना गया?
क्या है खबर?
इस साल नोबेल शांति पुरस्कार के संभावित दावेदारों में अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन (ISS) का नाम भी चर्चा में है। 9 अक्टूबर को इस पुरस्कार के विजेता की घोषणा होनी है। नॉर्वेजियन नोबेल कमेटी के सामने इस साल 287 नामांकन आए हैं, जिनमें 208 लोग और 79 संगठन शामिल हैं। हालांकि, नामांकन की आधिकारिक सूची सार्वजनिक नहीं की गई है। ऐसे में अंतरिक्ष स्टेशन का नाम सामने आना इस बार की दौड़ को खास बना रहा है।
वजह
ISS को दावेदार क्यों माना जा रहा?
ISS को इसलिए खास दावेदार माना जा रहा है, क्योंकि यह कई देशों के साथ मिलकर काम करने का उदाहरण रहा है।
25 साल से ज्यादा समय से अमेरिका, रूस, फ्रांस और कनाडा समेत कई देशों के लोग यहां साथ काम कर रहे हैं।
ऐसे समय में जब दुनिया के कई देशों के बीच तनाव और मतभेद बढ़ रहे हैं, ISS को शांतिपूर्ण अंतरराष्ट्रीय सहयोग का प्रतीक माना जा रहा है।
काम
अंतरिक्ष में साथ काम करने की मिसाल
पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट ओस्लो के मुताबिक, ISS ने दिखाया है कि राजनीतिक मतभेद रखने वाले देश भी एक साझा शांतिपूर्ण काम के लिए साथ आ सकते हैं।
ISS पर वैज्ञानिक शोध मिलकर किए जाते हैं। यह अहम है, क्योंकि अंतरिक्ष में देशों और निजी कंपनियों की गतिविधियां तेजी से बढ़ रही हैं।
पुरस्कार मिलने से वैश्विक सहयोग और शांतिपूर्ण अंतरिक्ष गतिविधियों को दुनिया भर में बढ़ावा देने का संदेश जा सकता है।
अन्य
चर्चा में ट्रंप, कार्नी और पोप लियो
ISS के अलावा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी और पोप लियो के नाम भी चर्चा में हैं।
कुछ लोग ट्रंप के शांति प्रयासों को आधार मानते हैं, जबकि उनके आलोचक कई संघर्षों को लेकर उनके दावों पर सवाल उठाते हैं। कार्नी को अंतरराष्ट्रीय सहयोग और कनाडा की भूमिका के लिए समर्थन मिल रहा है।
वहीं पोप लियो के शांति और बातचीत के रुख को भी अहम माना जा रहा है।