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स्टारलिंक के हजारों इंटरनेट सैटेलाइट को क्यों लाया जाएगा नीचे?
स्टारलिंक के हजारों इंटरनेट सैटेलाइट को लाया जाएगा नीचे

स्टारलिंक के हजारों इंटरनेट सैटेलाइट को क्यों लाया जाएगा नीचे?

Jan 02, 2026
05:14 pm

क्या है खबर?

एलन मस्क की अंतरिक्ष कंपनी स्पेस-X ने अंतरिक्ष में बड़ी संख्या में स्टारलिंक सैटेलाइट तैनात किए हैं। ये सैटेलाइट दूर-दराज इलाकों में इंटरनेट कनेक्टिविटी उपलब्ध कराते हैं। हालांकि, हाल ही में एक सैटेलाइट के फटने और दूसरे के टकराने की आशंका के बाद कंपनी ने सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है। इसी वजह से स्पेस-X अब स्टारलिंक नेटवर्क को और सुरक्षित बनाने के लिए बड़ा कदम उठाने जा रही है, ताकि भविष्य में किसी बड़े हादसे से बचा जा सके।

वजह 

टक्कर और हादसे के बढ़ते खतरे की वजह 

स्पेस-X के मुताबिक, लो-अर्थ ऑर्बिट (LEO) में सैटेलाइट की संख्या तेजी से बढ़ रही है। हाल ही में एक स्टारलिंक सैटेलाइट के खराब होने और दूसरे के चीनी सैटेलाइट से टकराने के खतरे ने खतरे की घंटी बजा दी। कंपनी का मानना है कि ज्यादा ऊंचाई पर सैटेलाइट रहने से टकराव और मलबे का जोखिम बढ़ता है। इसी कारण सुरक्षा बढ़ाने के लिए ऑर्बिट को नीचे लाने का फैसला किया गया है, जिससे कंट्रोल और निगरानी आसान हो सके।

 फैसला 

ऑर्बिट नीचे करने का फैसला क्यों लिया गया?

स्पेस-X ने बताया कि 9,000 से ज्यादा स्टारलिंक सैटेलाइट में से करीब 4,400 सैटेलाइट को 550 किलोमीटर की ऊंचाई से घटाकर 480 किलोमीटर पर लाया जाएगा। कंपनी का कहना है कि नीचे ऑर्बिट में सैटेलाइट जल्दी डीऑर्बिट हो जाते हैं। इससे खराब सैटेलाइट जल्दी जलकर खत्म हो जाते हैं और टकराव की संभावना कम होती है, क्योंकि 500 किलोमीटर से नीचे अंतरिक्ष मलबा और सक्रिय सैटेलाइट अपेक्षाकृत कम होते हैं।

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 योजनाएं 

भविष्य की योजनाएं और अंतरिक्ष में खतरे 

स्पेस-X के अनुसार, इस दशक के अंत तक LEO में 70,000 तक सैटेलाइट हो सकते हैं, जिससे खतरे और बढ़ सकते हैं। कंपनी ने 2025 में 160 से ज्यादा लॉन्च किए और 155 से अधिक देशों में इंटरनेट सेवा दी। हालांकि, विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर सही नियंत्रण नहीं हुआ तो टकराव, मलबा और अंतरिक्ष दुर्घटनाओं का जोखिम बढ़ेगा। इसलिए ऑर्बिट कम करना भविष्य में अंतरिक्ष को सुरक्षित रखने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

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