नासा के आर्टेमिस मिशन के लिए चुने गए वैज्ञानिक उपकरण क्या काम करेंगे?
क्या है खबर?
अंतरिक्ष एजेंसी नासा अगले महीने अपने महत्वपूर्ण चंद्र मिशन आर्टेमिस-II को लॉन्च करने की तैयारी में है। इस बीच नासा ने चांद पर भेजे जाने वाले अगले तीन चंद्र वैज्ञानिक उपकरण के चुनाव का खुलासा किया है। ये उपकरण कमर्शियल लूनर पेलोड सर्विसेज कार्यक्रम के तहत भेजे जाएंगे। इनका उद्देश्य चांद की सतह, अंदरूनी गर्मी और रेडिएशन को समझना है। इससे चांद के इतिहास, वातावरण और भविष्य के मानव मिशनों की तैयारी में अहम जानकारी मिलेगी।
EMILIA-3D
EMILIA-3D: चांद की सतह का तापमान नक्शा
आर्टेमिस मिशन के लिए चुना गया पहला उपकरण EMILIA-3D है, जिसका पूरा नाम एमिशन इमेजर फॉर लूनर इन्फ्रारेड एनालिसिस इन थ्री-डी है। यह चांद की सतह का तापमान तीन-आयामी रूप में मापेगा। इसमें इंफ्रारेड और स्टीरियो कैमरे लगाए गए हैं। यह चांद की मिट्टी और चट्टानों में तापमान के बदलाव को रिकॉर्ड करेगा। इससे वैज्ञानिक समझ पाएंगे कि अलग-अलग इलाकों में गर्मी कैसे फैलती है और कहां उतरना सुरक्षित हो सकता है।
LISTER
LISTER: चांद के अंदर की गर्मी की जांच
दूसरा उपकरण LISTER है, जो चांद की सतह के नीचे ड्रिल करके अंदर की गर्मी को मापेगा। इसका मकसद यह जानना है कि चांद के अंदर से कितनी गर्मी बाहर आती है। अलग-अलग जगहों पर माप करके चांद के अंदरूनी विकास को समझा जाएगा। इससे वैज्ञानिक यह जान सकेंगे कि चांद समय के साथ कैसे ठंडा हुआ। यह जानकारी भविष्य में चांद पर लंबे समय तक मानव मौजूदगी के लिए बहुत जरूरी मानी जा रही है।
SELINE
SELINE: चांद पर रेडिएशन का अध्ययन
तीसरा उपकरण SELINE है, जो चांद की सतह पर मौजूद रेडिएशन वातावरण की जांच करेगा। यह गैलेक्टिक कॉस्मिक किरणों और न्यूट्रॉन को मापेगा, जो अंतरिक्ष से आते हैं। चांद पर वायुमंडल न होने के कारण रेडिएशन ज्यादा असर डालता है। यह डाटा बताएगा कि वहां इंसानों को कितना खतरा हो सकता है। इससे भविष्य के अंतरिक्ष यात्रियों के लिए सुरक्षा उपाय और स्पेस सूट डिजाइन करने में मदद मिलेगी।
अन्य
भविष्य के चंद्र मिशनों के लिए अहम कदम
ये तीनों वैज्ञानिक उपकरण नासा के कमर्शियल लूनर पेलोड सर्विसेज कार्यक्रम के तहत 2028 तक चांद पर भेजे जाएंगे। अमेरिकी निजी कंपनियां इन्हें चांद की सतह तक पहुंचाएंगी। यह आर्टेमिस मिशन का एक अहम हिस्सा है, जिसका लक्ष्य चांद पर टिकाऊ मानव मिशन की नींव रखना है। इन अध्ययनों से नेविगेशन, सुरक्षा और लैंडिंग प्लानिंग बेहतर होगी। यह मिशन भविष्य में मंगल जैसे बड़े अभियानों का रास्ता भी तैयार करेगा।