नासा का बायोन्यूट्रिएंट्स प्रोजेक्ट क्या है? मंगल मिशन में यह आएगा बहुत काम
क्या है खबर?
नासा इन दिनों अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन (ISS) पर एक खास वैज्ञानिक अध्ययन कर रही है। इस शोध का मकसद यह समझना है कि फर्मेंटेड खाने लायक सामान और जरूरी पोषक तत्व अंतरिक्ष में कैसे व्यवहार करते हैं। लंबे समय तक अंतरिक्ष में रहने पर सामान्य पैकेज्ड भोजन पर्याप्त नहीं होता। इसलिए वैज्ञानिक यह देख रहे हैं कि क्या सूक्ष्मजीव अंतरिक्ष में ही जरूरी पोषक तत्व बना सकते हैं, ताकि भविष्य के चंद्र और मंगल मिशन में मदद मिल सके।
प्रोजेक्ट
क्या है बायोन्यूट्रिएंट्स प्रोजेक्ट?
नासा का बायोन्यूट्रिएंट्स प्रोजेक्ट माइक्रोऑर्गेनिज्म की मदद से अंतरिक्ष में जरूरी न्यूट्रिएंट्स बनाने पर केंद्रित है। यह प्रक्रिया पृथ्वी पर दही या केफिर बनाने जैसी है, जहां सूक्ष्मजीव भोजन को बदलते हैं। ISS पर क्रू खास पैक में यीस्ट और स्टार्टर कल्चर को पानी मिलाकर बढ़ने देते हैं। बाद में इन सैंपल्स को फ्रीज कर पृथ्वी पर भेजा जाता है, ताकि उनके असर और सुरक्षा की जांच की जा सके।
वजह
अंतरिक्ष में फर्मेंटेशन क्यों जरूरी?
लंबे अंतरिक्ष मिशन में भोजन को लंबे समय तक सुरक्षित रखना चुनौती है। अभी ज्यादातर खाना फ्रीज-ड्राई या पैकेज्ड होता है, जो सीमित समय तक चलता है। अगर इंसान मंगल या चंद्रमा पर लंबे समय तक रहेगा, तो वहां ताजा और पोषक भोजन की जरूरत होगी। वैज्ञानिक जानना चाहते हैं कि माइक्रोग्रैविटी और अंतरिक्ष विकिरण में फर्मेंटेशन प्रक्रिया कैसे काम करती है और क्या इससे सुरक्षित भोजन बनाया जा सकता है।
मदद
भविष्य के मिशन में कैसे मिलेगी मदद?
इन प्रयोगों के सैंपल स्पेस-X जैसे यान से पृथ्वी पर लाए जाते हैं और नासा की लैब में जांचे जाते हैं। वैज्ञानिक देखते हैं कि सूक्ष्मजीव कितनी तेजी से बढ़ते हैं और कितने पोषक तत्व बनाते हैं। यह जानकारी आर्टेमिस मिशन और मंगल यात्रा की तैयारी में काम आएगी। इससे भविष्य में अंतरिक्ष यात्रियों को लंबी यात्राओं के दौरान ताजा, सुरक्षित और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है।