UCLA के वैज्ञानिकों ने खोजा दिमाग के सोचने का रहस्य
क्या कभी सोचा है कि इंसान का दिमाग सोचने, याद रखने और बोलने के लिए कैसे तैयार होता है? 2 नए अध्ययनों ने अब इस राज से जुड़े बड़े सुराग खोजे हैं।
लॉस एंजिल्स की यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया के वैज्ञानिकों ने पता लगाया है कि 'रेडियल ग्लिया' नाम की खास स्टेम कोशिकाएं दिमाग के कॉर्टेक्स को बनाने में मुख्य भूमिका निभाती हैं। कॉर्टेक्स ही दिमाग का वो हिस्सा है, जो हमें बाकी जीवों से अलग बनाता है।
ऊर्जा और थैलेमस देते हैं रेडियल ग्लिया को आकार
रेडियल ग्लिया कोशिकाएं अकेले काम नहीं करतीं। वे ऊर्जा (ग्लूकोज) से जुड़े संकेतों पर प्रतिक्रिया देती हैं और दिमाग के दूसरे फाइबर से मिलने वाले स्पर्श से भी प्रभावित होती हैं।
एक अध्ययन से पता चला कि ये कोशिकाएं 'पेंटोज फास्फेट पाथवे' पर बहुत ज्यादा निर्भर करती हैं। यह पाथवे ग्लूकोज का इस्तेमाल तेजी से कोशिका विभाजन के लिए ईंधन के तौर पर करता है।
दूसरे अध्ययन में पता लगा कि शुरुआती दौर में थैलेमस से निकलने वाले तंत्रिका तंतु सीधे रेडियल ग्लिया को छूते हैं और उन्हें ज्यादा न्यूरॉन बनाने का निर्देश देते हैं।
यह प्रक्रिया NRXN1 नाम के एक जीन से जुड़ी है, जिसका संबंध ऑटिज्म से भी है। इससे वैज्ञानिक दिमाग के स्वस्थ विकास और न्यूरोडेवलपमेंटल डिसऑर्डर को और गहराई से समझ पाएंगे।