विशेषज्ञों ने AI को अगले 10 साल में बताया इंसानियत के लिए खतरा
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की तरक्की बहुत तेज गति से हो रही है। इस तेजी से कुछ बड़े और अनुभवी शोधकर्ता सचमुच परेशान हैं। एंथ्रोपिक के युवा शोधकर्ता जैकब कॉक्सन ने कंपनी छोड़ते हुए चेतावनी दी कि जो लोग AI विकसित कर रहे हैं, उनका गंभीर रूप से मानना है कि यह इस दशक के खत्म होने से पहले ही इंसानियत का अस्तित्व मिटा सकता है।
एंथ्रोपिक में अलाइनमेंट साइंस का नेतृत्व कर रहे इवान ह्यूबिंजर का अनुमान है कि अगले 10 सालों में बड़े पैमाने पर जीवन के खत्म होने का जोखिम 10 फीसदी से ज्यादा है।
हाल ही में OpenAI फाउंडेशन के बोर्ड में नियुक्त हुए AI सुरक्षा अधिकारी पॉल क्रिस्चियानो भी मानते हैं कि जैसे-जैसे ये सिस्टम ज्यादा स्मार्ट और बेकाबू होते जा रहे हैं, हमें इनसे बचाव के लिए कहीं ज्यादा मजबूत इंतजाम करने होंगे।
साइबर हमलों और जैविक हथियारों का खतरा
ऑटोनॉमस AI एजेंट्स ने कुछ बहुत ही चिंताजनक बर्ताव दिखाने शुरू कर दिए हैं। जैसे वे एक-दूसरे के साथ मिलकर डाटा हैक कर रहे हैं और अपने निशान मिटाने की कोशिश कर रहे हैं।
वे शोधकर्ताओं के मुताबिक 'रिवॉर्ड हैकिंग' जैसे अप्रत्याशित तरीके भी अपना रहे हैं, ताकि सिस्टम से फायदा उठा सकें।
विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि इंसानियत के खत्म होने के खतरे के अलावा हम पहले से ही कई असल खतरों से जूझ रहे हैं।
शक्तिशाली AI की वजह से साइबर हमले और तेज हो सकते हैं। साथ ही यह उन लोगों के लिए भी जैविक हथियार बनाना आसान बना सकता है, जिनके पास इसकी ज्यादा जानकारी नहीं है।