ज्यादा स्क्रीन देखने वाले युवाओं में तनाव-अकेलेपन का खतरा दोगुना, अध्ययन में खुलासा
स्क्रीन पर ज्यादा वक्त बिताना सामान्य बात नहीं है। एक नए शोध से पता चला है कि युवाओं में अवसाद, घबराहट और अकेलेपन का खतरा इसकी वजह से लगभग दोगुना हो सकता है।
इस अध्ययन में 90 लाख से भी ज्यादा लोगों के डाटा का विश्लेषण किया गया। इसमें यह भी सामने आया कि जो लोग बहुत ज्यादा स्क्रीन का इस्तेमाल करते हैं, उनमें खुद को नुकसान पहुंचाने, व्यवहार से जुड़ी दिक्कतें और नींद की समस्याएं भी बढ़ जाती हैं।
डिजिटल प्रोडक्ट्स के नियमन की मांग
हालांकि, यह अध्ययन सीधे तौर पर यह साबित नहीं करता कि स्क्रीन ही इन समस्याओं की सीधी वजह हैं, लेकिन इसका पैटर्न इतना मजबूत है कि विशेषज्ञ सरकारों से इस मामले में दखल देने की अपील कर रहे हैं।
ज्यादातर डाटा अमीर देशों से आया है, वहीं भारत में भी युवाओं के बीच स्क्रीन का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। शोधकर्ताओं ने डिजिटल उत्पादों के लिए और कड़े नियम बनाने की मांग की है। वे तो यहां तक सुझाव देते हैं कि युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य को दुनियाभर में सुरक्षित रखने के लिए एक वैश्विक संधि होनी चाहिए।