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क्या सुप्रीम कोर्ट मुख्य चुनाव आयुक्त को कर सकता है निलंबित? जानिए क्या कहता है कानून
सुप्रीम कोर्ट में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई हुई है

क्या सुप्रीम कोर्ट मुख्य चुनाव आयुक्त को कर सकता है निलंबित? जानिए क्या कहता है कानून

Oct 05, 2026
04:45 pm

क्या है खबर?

मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को उनके पद से अंतरिम रूप से निलंबित करने की मांग वाली याचिका ने भारतीय न्यायपालिका और संविधान के गलियारों में एक कानूनी बहस छेड़ दी है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा केंद्र सरकार और चुनाव आयोग को नोटिस जारी किए जाने के बाद अब यह बड़ा प्रश्न खड़ा हो गया है कि क्या सुप्रीम कोर्ट के पास एक संवैधानिक संस्था के प्रमुख को निलंबित करने या उसके काम पर रोक लगाने का अधिकार है?

इनकार

सुप्रीम कोर्ट ने ज्ञानेश कुमार के निलंबन से किया इनकार

याचिकाकर्ताओं के CEC ज्ञानेश कुमार के निलंबन पर मुख्य न्यायाधी (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जयमाल्य बागची और जस्टिस वी मोहाना की पीठ ने एकतरफा आदेश देने से इनकार कर दिया।

कोर्ट ने कहा, "हम किसी अखबार की रिपोर्ट के आधार पर आदेश पारित नहीं कर सकते हैं और यह तय करने से पहले कि क्या CEC ज्ञानेश कुमार ने अकेले ही उन शक्तियों का प्रयोग किया है जो संवैधानिक रूप से पूरे बहुसदस्यीय चुनाव आयोग के लिए निर्धारित हैं।"

कार्य

अनुच्छेद 324 के तहत कार्य करता है चुनाव आयोग

CEC का कार्यालय संविधान द्वारा संरक्षित है। ऐसे में आयोग से कार्यपालिका से स्वतंत्र रूप से कार्य करने की अपेक्षा की जाती है।

अनुच्छेद 324 चुनावों के पर्यवेक्षण, निर्देशन और नियंत्रण का अधिकार आयोग को देता है, न कि CEC को।

इसमें यह भी प्रावधान है कि अगर अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति की जाती है, तो CEC आयोग के अध्यक्ष के रूप में कार्य करता है। ऐसे में आयोग में उसके द्वारा लिए गए निर्णय भी महत्वपूर्ण होते हैं।

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सवाल

क्या सुप्रीम कोर्ट CEC को निलंबित कर सकता है?

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 324(5) के तहत CEC को विशेष सुरक्षा कवच प्राप्त है।

CEC को उनके पद से केवल उसी रीति से और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है, जिस रीति से और जिन आधारों पर सुप्रीम कोर्ट के किसी न्यायाधीश को हटाया जाता है।

इसका सीधा मतलब यह है कि CEC को हटाने का एकमात्र जरिया संसद में महाभियोग की प्रक्रिया है, जहां दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) में विशेष बहुमत से प्रस्ताव पारित होना अनिवार्य है।

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जानकारी

कोर्ट की क्या है सीमा?

संविधान में न्यायपालिका (सुप्रीम कोर्ट) को किसी CEC को सीधे बर्खास्त या निलंबित करने की शक्ति स्पष्ट रूप से नहीं दी गई है। यही कारण है कि इस याचिका को 'अभूतपूर्व' माना जा रहा है। ऐसे में इस पर आगे की सुनवाई महत्वपूर्ण है।

सिद्धांत

न्यायपालिका करती है शक्तियों के पृथक्करण के सिद्धांत का पालन

कानूनी विशेषज्ञों और पूर्व सुप्रीम कोर्ट फैसलों के अनुसार, न्यायपालिका हमेशा से शक्तियों के पृथक्करण के सिद्धांत का पालन करती रही है। इसमें स्वतंत्रता का संरक्षण भी बहुत आवश्यक है।

अगर, अदालतें एकतरफा आरोपों के आधार पर चुनाव आयोग जैसी स्वतंत्र संवैधानिक संस्थाओं के प्रमुखों को निलंबित करने लगेंगी, तो इन संस्थाओं की स्वायत्तता और निष्पक्षता खतरे में पड़ सकती है।

ऐसे में संविधान में अदालतों की सीमाएं भी निर्धारित की गई हैं।

कानून

सामूहिक निर्णय लेने के संबंध में कानून क्या कहता है?

CEC और अन्य निर्वाचन आयुक्त अधिनियम, 2023 की धारा 18 में कहा गया है कि आयोग को यथासंभव सर्वसम्मति से कामकाज करना चाहिए।

अगर, CEC और अन्य निर्वाचन आयुक्तों के बीच मतभेद हो, तो मामले का निर्णय बहुमत से किया जाएगा।

याचिका में तर्क दिया गया है कि यह प्रावधान चुनाव आयोग के संवैधानिक स्वरूप को एक सामूहिक संस्था के रूप में सुदृढ़ करता है। ऐसे में CEC उस सामूहिक शक्ति को व्यक्तिगत शक्ति में परिवर्तित नहीं कर सकता है।

रोक

क्या चुनाव आयोग के आदेशों पर रोक लगा सकता है सुप्रीम कोर्ट?

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि जांच में अगर आयोग के आदेश को एकतरफा पाया जाता है तो उन पर रोक लगाने की शक्ति कोर्ट के पास है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या इस तरह की अंतरिम रोक आयोग के संवैधानिक संरक्षण को कमजोर किए बिना लगाई जा सकती है।

पूर्व CEC टीएन शेषन के कार्यकाल के दौरान भी सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग के सामूहिक स्वरूप और बहुमत से निर्णय लेने के सिद्धांत पर बल दिया था।

विवाद

क्या है पूरा विवाद?

लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, यह मामला राकेश कुमार सिंह और अधिवक्ता शैलेंद्र मणि त्रिपाठी द्वारा दायर 2 अलग-अलग याचिकाओं से जुड़ा है।

याचिकाओं में मीडिया रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए दावा किया गया कि अक्टूबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच चुनाव आयोग के नाम पर करीब 14 बड़े फैसले एकतरफा तरीके से लिए गए।

आरोप है कि इन फैसलों पर आयोग के 2 अन्य आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने भी आपत्तियां दर्ज कराई थीं।

मांग

याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट से क्या-क्या मांग की हैं?

याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट से चुनाव आयोग की बैठकों के एजेंडे, नोट शीट्स और IT एक्सेस रिकॉर्ड को जांच के लिए कोर्ट के संरक्षण में सुरक्षित करने, सुप्रीम कोर्ट के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक स्वतंत्र न्यायिक जांच आयोग या विशेष जांच दल (SIT) का गठन करने और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 32 के तहत आधिकारिक कर्तव्यों के उल्लंघन के लिए दोषी अधिकारियों के खिलाफ शिकायत दर्ज कर मुकदमा चलाए जाने की मांग की है।

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