वैज्ञानिकों ने लॉन्ग कोविड के लंबे समय तक रहने की वजह का लगाया पता
कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी, सैन फ्रांसिस्को (UCSF) के एक नए अध्ययन ने यह पता लगाने की कोशिश की है कि आखिर इतने लोगों में लॉन्ग कोविड लंबे समय तक क्यों रहता है।
शोधकर्ताओं ने अपने अध्ययन में पाया कि लॉन्ग कोविड से जूझ रहे मरीजों में शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यून सिस्टम) तो काफी सक्रिय रहती है, लेकिन वह वायरस के बचे हुए टुकड़ों को शरीर से पूरी तरह साफ नहीं कर पाती।
इसे उन्होंने असमन्वित प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया (अनकोऑर्डिनेटेड इम्यून रिस्पॉन्स) बताया है।
आंत नमूने की जांच से हुआ खुलासा
वैज्ञानिकों ने लॉन्ग कोविड से पीड़ित और संक्रमण से पूरी तरह ठीक हो चुके लोगों के आंत के ऊतकों की जांच की। ये सैंपल संक्रमण के लगभग 2 साल बाद लिए गए थे।
अध्ययन में सामने आया कि लॉन्ग कोविड के एक चौथाई से ज्यादा मरीजों की आंत में वायरल RNA मिला, जबकि ठीक हो चुके लोगों में यह बहुत कम था। हालांकि, इसका यह मतलब नहीं है कि शरीर में वायरस अब भी सक्रिय रूप से मौजूद है।
सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि इम्यून सिस्टम से जुड़ी गड़बड़ियां खून के नमूनों के मुकाबले आंत के नमूनों में कहीं ज्यादा पाई गईं। इससे पता चलता है कि मौजूदा खून के टेस्ट शायद पूरी जानकारी नहीं दे पाते।
शोधकर्ताओं का मानना है कि भविष्य के इलाज के लिए 2 बातें जरूरी होंगी, जिनमें एक तो शरीर में बचे हुए वायरस को खत्म करना और दूसरा इम्यून सिस्टम को दोबारा सही ढंग से काम करने के लिए तैयार करना। तभी थकान और 'ब्रेन फॉग' (दिमाग का धुंधलापन) जैसे लगातार बने रहने वाले लक्षणों से छुटकारा मिल पाएगा।