SPJ ने AI और घटते भरोसे के दौर में बदली पत्रकारिता की आचार संहिता
सोसाइटी ऑफ प्रोफेशनल जर्नलिस्ट्स (SPJ) अपनी आचार संहिता (कोड ऑफ एथिक्स) में बदलाव कर उसे नया रूप दे रही है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), फ्रीलांस क्रिएटर्स और लोगों के घटते भरोसे जैसी कई बड़ी चुनौतियों से निपटने के लिए यह बदलाव बहुत जरूरी है।
2014 के बाद यह पहली बार है, जब इसमें कोई अपडेट किया गया है। इसमें ऐसी नई बातें जोड़ी गई हैं, जो पत्रकारों को आज के जमाने की नैतिक मुश्किलों से बेहतर तरीके से निपटने में काम आएंगी।
सच्चाई और निष्पक्षता पर खास जोर
इस ड्राफ्ट में साफ तौर पर कहा गया है, "याद रखें कि खबर कितनी भी तेजी से दी जाए या किसी भी टेक्नोलॉजी या माध्यम से आए, वह गलत या अनुचित नहीं होनी चाहिए।"
इससे यह स्पष्ट होता है कि खबर पहुंचाने का तरीका चाहे कुछ भी हो, सच्चाई और सटीकता ही सबसे अहम हैं। पहले जहां 'बेआवाजों को आवाज दो' पर जोर था, वहीं अब पत्रकारों से कहा गया है कि वे कमजोर लोगों को अनुचित रूप से अलग-थलग किए जाने का मुकाबला करें।
SPJ चाहता है कि सबकी कहानी निष्पक्ष तरीके से सामने आए, खासकर ऐसे दौर में जब इंफ्लुएंसर्स और गलत जानकारी की भरमार है। इस अपडेटेड आचार संहिता पर अक्टूबर में वोटिंग होनी है, उससे पहले लोगों से इस पर उनकी राय ली जा रही है। यह बदलाव कई महीनों की चर्चा के बाद आया है, जिसमें इंडियानापोलिस में हुई एक अहम बैठक भी शामिल थी।